यदि आप उन गिने चुने लोगों में से हैं जो अब भी अपने किसी मित्र या स्वयं गूगल के द्वारा वेव का इस्तेमाल करने के निमंत्रण का इंतजार कर रहे हैं तो बेहतर है उम्मीद छोड़ दें. गूगल ने घोषणा की है कि उनकी बहुप्रचारित सेवा गूगल वेव को अलविदा कहने का समय आ गया है.
एक वर्ष पहले गूगल की इस नई सेवा ने लोगों के बीच आकर्षण पैदा किया था. गूगल वेव एक क्रोस प्लेटफार्म संवाद टूल है जो लोगों को सीधी बातचीत करने और फाइलें साझा करने की सुविधा देता है. गूगल के कई फीचर क्रांतिकारी थे, जैसे कि ड्रेग एंड ड्राप फाइल शेरिंग और अक्षर दर अक्षर टाइपिंग पढना [सामने वाला व्यक्ति क्या लिख रहा है वह तुरंत देखना] आदि.
गूगल वेव एक ऐसा विचार था जिसके बारे में कहा गया था कि यह एक दिन ईमेल को पुराने जमाने की बात बना देगा. यहाँ लोग किसी प्रोजेक्ट पर साझा काम कर सकते थे, लाइव सम्पादन सम्भव था और फोटो और वीडियो शेरिंग लाजवाब थी. तो फिर ऐसा क्या हुआ कि वेव फैल हो गया?
गूगल वेव के उपयोग के बारे में लोग उलझन में रहे. उसकी पहुँच उतने लोगों तक नहीं हो पाई जितनी की उम्मीद थी. जिन लोगों ने वेव का इस्तेमाल किया उनमें से अधिकतर के पास एक ही सवाल था - "सेवा अच्छी है, पर इसका इस्तेमाल कैसे करूँ?"
यहीं पर गूगल से सबसे बड़ी चूक हुई. हालाँकि कम्पनी ने कई उदाहरण देकर समझाने की कोशिश की कि वेव का किस प्रकार से उपयोग हो सकता है, परंतु ईमेल, चैट और फाइल शेरिंग के अन्य विकल्पों के आदी लोगों तक वह बात ठीक से पहुँची नहीं. दूसरी तरफ गूगल ने पहले दिन से वेव को सभी लोगों के लिए उपलब्ध भी नहीं करवाया. वह हमेशा एक आधा अधुरा तैयार सिस्टम ही लगता रहा. और इससे भी इसकी लोकप्रियता को झटका लगा. गूगल स्वीकार करता है कि - लोगों ने वेव को उस तरह से स्वीकार नहीं किया जिस तरह से हम चाहते थे.
तो अब गूगल वेव उन कुछ विचारों की सूचि में शामिल हो गया है जो क्रांतिकारी थे परन्तु जो निष्फल रहे. वेव गूगल का एकमात्र ऐसा विचार नहीं है जो निष्फल रहा है. कम से कम चार ऐसी और सेवाएँ हैं जो या तो बंद कर दी गई है अप्रासंगिक हो गई. उदाहरण के लिए गूगल हैल्थ, डोजबॉल, नोटबुक और लाइवली.
परंतु गूगल वेव की निष्फलता गूगल के लिए बहुत बड़ा झटका है. परंतु गूगल के सीइओ एरिक शिमट इसे कुछ इस तरह से लेते हैं - गूगल वेव की निष्फलता मात्र एक विचार की नाकामी है. उन्होनें कहा - याद रखिए, हम वे लोग हैं जो अपनी निष्फलताओं का जश्न मनाते हैं. गूगल ऐसी कम्पनी है जो नए विचारों को प्रोत्साहन देती है. कुछ नया लाओ, मेहनत करो, अगर फिर भी वह विचार सफल ना हो तो कोई बात नहीं. सबक सीखो और आगे बढ जाओ.
वैसे वेव गूगल का विचार था इसलिए उसकी निष्फलता की इतनी चर्चा होती है, अन्यथा कई ऐसे क्रांतिकारी डोट कॉम विचार अकाल मृत्यु को प्राप्त होते हैं और उनकी तरफ किसी का ध्यान भी नहीं जाता. ध्यान दीजिए - ट्विटर भी ऐसा ही एक विचार था जो असफल होने की कगार पर था. परंतु मल्टीप्लेटफार्म बनते ही और सेलिब्रिटियों द्वारा इसे अपना लिए जाते ही इसकी लोकप्रियता में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि होने लगी.

