एक जमाना था जब इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, और आज का जमाना ऐसा है जब इसके होने की कल्पना नहीं की जा सकती. बात हो रही है फ्लोपी डिस्क की. 3.5 इंच की इस स्टोरेज डिवाइज़ को अंतत: विदा कर दिया गया है. जापान की कम्पनी सोनी ने 3.5 इंच की फ्लोपी डिस्क का उत्पादन बंद करने का निर्णय लिया है. सोनी दुनिया की वह अंतिम कम्पनी है जो अभी तक फ्लोपी डिस्क का उत्पादन कर रही है. लेकिन सोनी भी अब अगले वर्ष से इस डिस्क का उत्पादन बंद कर देगी. इस तरह से फ्लोपी डिस्क का करीब 42 वर्षों का सफर समाप्त हो जाएगा.
इतिहास:
फ्लोपी डिस्क का आविष्कार आई.बी.एम कम्पनी में काम करने वाले एक इंजीनियार एलन शुगार्ट ने किया था. एलन ने एक लचीली प्लास्टिक डिस्क के ऊपर मैग्नेटिक आयर्न ऑक्साइड की कॉटिंग की थी. इस डिस्क की सतह पर डिजिटल आँकड़े लिखे और पढे जा सकते थे. यह डिस्क 8 इंच की थी.
1976 में एलन ने अपनी डिस्क को थोड़ा छोटा किया. उन्होनें वांग लेबोरेटरीज़ के लिए 5.25 इंच की डिस्क बनाई जो अधिक सुविधाजनक थी और उसमें 1.2 एम.बी. तक डेटा संग्रहित किए जा सकते थे. इस डिस्क ने तेजी से लोकप्रियता प्राप्त की.
लेकिन 1981 में जापान की कम्पनी सोनी ने धमाका कर दिया. इस कम्पनी ने 3.5 इंच की फ्लोपी डिस्क बाजार में लॉंच की. इस डिस्क की कैसिंग भी कठोर प्लास्टिक से बनाई गई थी जिससे यह अधिक मजबूत थी. इसमें संग्रहित डेटा अधिक समय तक सुरक्षित रह सकता था. इसकी स्टोरेज क्षमता भी आम डिस्क से अधिक यानी कि 1.44 एम.बी. की थी. 80 के दशक में इतने डेटा काफी होते थे और इस तरह से इस डिस्क ने काफी लोकप्रियता अर्जित की थी.
1996 आते आते फ्लोपी डिस्क का बाज़ार काफी बढ गया था. इस वर्ष दुनिया भर में करीब 50 करोड़ फ्लोपी डिस्क बेची गई थी. लेकिन इसके बाद इसका बाज़ार सिकुड़ने लगा. धीरे धीरे नई आधुनिक स्टोरेज डिवाइज़ें आने लगी और लोगों ने फ्लोपी डिस्क का इस्तेमाल कम कर दिया. अब फ्लोपी डिस्क की जगह सीडी, डीवीडी, ज़िप ड्राइव और बाद में यूएसबी ड्राइव ने ले ली.
2009 में 1 करोड़ फ्लोपी डिस्क बेची गई. इनमें से अधिकतर डिस्कें भारत और जापान में खरीदी गई थी. लेकिन अब इसका बाज़ार काफी सिकुड़ गया है और इसका उत्पादन लाभ देने वाला नहीं रहा है. अब समय आ गया है फ्लोपी डिस्क को अंतिम विदा देने का.

