बतौर अभिनेता फरहान अख़्तर की यह तीसरी फिल्म है और वे इतनी सहजता से अभिनय करते हैं कि कोई भी सोच सकता है कि वे निर्देशक हैं कि अभिनेता या फिर गायक! दीपिका पादुकोण अपने उसी अंदाज में हैं जिस अंदाज में वे कई फिल्मों में दिखाई देती हैं. फिल्म के कहानी नए प्रकार की है, लेकिन अंत में वह पुरानी बोतल में नई शराब लगती है.
कार्तिक [फरहान अख़्तर] एक शर्मिला इंसान है जिसके पास खोने को कुछ नहीं है क्योंकि उसे कुछ प्राप्त ही नहीं होता. वह एक "लूजर" है. उसके बॉस [राम कपूर] को उस पर भरोसा नहीं है, और सभी अन्य कर्मचारी और उसकी प्रेमिका सोनाली [दीपिका पादुकोण] को भी उसकी परवाह नहीं होती.
लेकिन एक दिन कार्तिक की जिंदगी बदल जाती है. उसे एक फोन कॉल प्राप्त होता है जिसमें कार्तिक ही बोल रहा होता है. कार्तिक का फोन मित्र जो कि वह स्वयं ही है, उसे नई जिदंगी देता है. लेकिन वह है कौन? यही फिल्म का सस्पेंस है.
कार्तिक कॉलिंग कार्तिक एक सस्पेंस भरी प्रेम कहानी है. फिल्म के निर्देशक विजय लालवाणी की पहली फिल्म है और उनमें काफी प्रतिभा है. मध्यांतर से पहले फिल्म काफी अच्छी बनी है.
फरहान अख्तर ने बेहतरीन अभिनय किया है. दीपिका भी जमती हैं. विशेष उल्लेख राम कपूर का करना चाहिए, उन्होनें बहुत अच्छी तरह से अपने पात्र को निभाया है. राम कपूर को अब और अधिक फिल्में मिल सकती है. संगीत बढिया है.
फिल्म मध्यांतर के बाद झोल खाने लगती है और फिल्म का अंत भी फिल्म के हिसाब से जानदार नहीं है.
कार्तिक कॉलिंग कार्तिक युवाओं को पसंद आएगी. यह एक मेट्रो फिल्म है जो मल्टिप्लेक्सों में चल सकती है.
![]()

