अपूर्व लखिया की बतौर निर्माता यह पहली फिल्म है. इस फिल्म का निर्देशन उन्होनें नहीं किया है बल्कि यह जिम्मा अपने सहायक शॉन अरान्हा को सौंपा है, जिनकी बतौर निर्देशक यह पहली फिल्म है. शॉन अपनी पहली फिल्म में प्रभावित करते हैं. चुँकि यह एक सस्पेंस फिल्म है, इसलिए रहस्य को क्लाइमैक्स तक बनाए रखना काफी महत्वपूर्ण होता और इसमें वे सफल होते हैं.
यह 6 दोस्तों की कहानी है. बचपन से लेकर युवावस्था तक उनके जीवन में कुछ ऐसा घटित होता है जिससे उनकी जिंदगियाँ बदल जाती है.
कहानी शुरू होती है एक क्रिसमस पार्टी से जहाँ 6 बच्चे एक साथ उत्सव मना रहे हैं. ये बच्चे एक दूसरे के मित्र हैं और अपने अपने अभिभावकों की निगरानी में पार्टी मना रहे हैं. लेकिन उनके अभिभावकों को पता नहीं चलता कि एक बच्चा ड्रग का सेवन करता है, एक बच्चा अपने पास बंदूक रखता है और एक लड़का और लड़की अंतरंग संबंध बनाते हैं.
12 वर्ष बाद ये सभी दोस्त फिर से मिलते हैं और फिर से क्रिसमस पार्टी मनाई जाती है लेकिन अब तक काफी कुछ बदल चुका है. ओम [पूरब कोहली] ने अपने जीवन के 12 साल अस्पताल में बिताए हैं और इस दौरान उससे मिलने कोई नहीं आया है. यहाँ तक कि उसका भाई अभिमान्य भी नहीं और ना ही उसकी प्रेमिका ज्योतिका. लेकिन ओम को कोई शिकायत नहीं है, लेकिन इसके पीछे के राज के बारे में कोई नहीं जानता. सभी दोस्त चाहकर नहीं मिलते हैं लेकिन किसी के इशारों पर नाच रहे होते हैं और उन्हें इसकी जानकारी नहीं होती. कौन है वह?
इस फिल्म में पूरब कोहली ने मानसिक रूप से विकृत व्यक्ति का अच्छा पात्र निभाया है. उनमें काफी प्रतिभा है. बाकी सभी कलाकार अपेक्षाकृत नए हैं. अर्जन बाजवा भी काफी प्रभावित करते हैं और समीर कोचर भी. संगीत ठीकठाक है. छायांकन बढिया है.
फिल्म का क्लाइमैक्स सबसे खराब है. पूरी फिल्म के दौरान तैयार किया गया बढिया सस्पेंस अंत आते आते कमजोर होने लगता है.
यह एक छोटे बजट की अच्छी फिल्म है. देख सकते हैं.
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