Monday, Feb 13th

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वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई: समीक्षा - हाजी की हकीकत?

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once-upon-a-timeसन 70 की मुम्बई को बड़े पर्दे पर देखना काफी रोमांचक लगता है. वह जमाने की मुम्बई की और लगभग हर जगह माफियाओं की दखल देखकर लगता है कि आज सममुच में जमाना कितना बदल गया है. फिल्म की शुरूआत मे दिखाया जाता है कि इस फिल्म के पात्र काल्पनकि हैं और इस फिल्म का हाजी मस्तान मिर्ज़ा से कोई संबंध नहीं है. परंतु यह समझना मुश्किल नहीं कि जो पात्र अजय देवगन निभा रहे हैं वो कौन है?


एसीपी एग्नेल विल्सन [रणदीप हुड्डा] फिल्म के सुत्रधार हैं और पूरी कहानी उनके द्वारा कही गई है. 70 के जमाने में एक छोटा मोटा आदमी सुल्तान मिर्जा [अजय देवगन] किस तरह से बड़ा तस्कर बनता है यह देखना रोमांचक लगता है. सुल्तान और उसके खास शोएब खान [इमरान हाशमी] के बीच सत्ता का संघर्ष भी रोचक है. दोनों सख्त हैं और दोनों ही सनकी हैं. वे दोनों तभी सामान्य लगते हैं जब वे अपनी प्रेमिकाओं रेहाना [कंगना राणावत] और मुमताज़ [प्राची देसाई] के साथ होते हैं. सुल्तान बॉलीवुड अभिनेत्री रेहाना से और शोएब एक सेल्सगर्ल मुमताज़ से प्यार करता है.

पूरी कहानी गरीबी से उठकर कानून टकराकर सत्ता हासिल करने, तस्करी करने, धोखाधड़ी करने और सत्ता के लिए हर स्तर तक गिरने के ऊपर आधारित है.

अजय देवगन अपने पात्र के साथ पूरा न्याय करते हैं. उनका पात्र हाजी मस्तान के ऊपर आधारित है यह समझना मुश्किल नहीं लगता. गरीबों का मसीहा और धुर्त तस्कर, दोनों रूपों वे छा जाते हैं. शोएब खान जो कि दाउद एब्राहिम से मिलता जुलता पात्र है, के रूप में इमरान हाशमी भी जमते हैं. कंगना राणावत और प्राची देसाई ने भी अच्छा अभिनय किया है. मिलन लुथरिया का निर्देशन बढिया है.

इस फिल्म में कमी सिर्फ इतनी है कि कहीं कहीं पात्रों को जरूरत से अधिक बढा चढा कर दिखाया गया है. दूसरी तरफ कहानी को ठीक ढंग से दर्शाया नहीं गया और इसके लिए पटकथा लेखक जिम्मेदार माने जा सकते हैं. रेहाना का अचानक बिमार पड़ना, सुल्तान मिर्ज़ा का राजनीति में आना, विल्सन के द्वारा आत्महत्या का प्रयास करना और ऐसे ही कुछ अन्य घटनाएँ ठीक से दर्शाई नहीं गई.

परंतु फिर भी यह फिल्म अपनी छाप छोड़ने में कामयाब होती है. एक बार जरूर देख सकते हैं.

3star

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