भारतीय टेलीविजन मीडिया अब पश्चिमी देशों की तरह ही परिपक्व हो रहा है और इसका एक उदाहरण है कि अब टीवी पर विषय आधारित चैनलों की संख्या बढ रही है. और यह बढोत्तरी उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से हो रही है. अब 'मिक्सड बैग" चैनलों का जमाना जा रहा है और व्यक्तिगत रूचि पर आधारित चैनलों की संख्या बढ रही है. ऐसा पहले नहीं था और इससे पहले यह सोचा भी नहीं जा सकता है. उदाहरण के लिए किसने सोचा था कि भारत में ऑटो और गोल्फ आधारित चैनल भी आ सकते हैं! परंतु अब ऐसा नहीं है. ना केवल ऑटो, इंजीनियरिंग और गोल्फ बल्कि प्रतिरक्षा, विज्ञान, अपराध, महिला, अंग्रेजी भाषी महिला, और यहाँ तक कि पाककला आधारित चैनल या तो शुरू हो चुके हैं या प्रसारण की मंजूरी की प्रतीक्षा में है.
मशहूर सेलिब्रिटी शेफ संजीव कपूर अपना पाककला आधारित चैनल ला रहे हैं. यह चैनल मलेशिया के एस्ट्रो नेटवर्क के गठबंधन के साथ प्रसारित होगा. दूसरी तरफ डिस्कवरी नेटवर्क ने भी 5 नए विषय आधारित चैनलों के प्रसारण के लिए आवेदन किया है. इनमें शामिल है - मिलट्री चैनल, इनवेस्टीव डिस्कवरी, डिस्कवरी किड्स, डिस्कवरी होम एंड हैल्थ और डिस्कवरी 3डी. इन सभी चैनलों को अनुमति मिल जाने के बाद डिस्कवरी नेटवर्क 11 विषय आधारित चैनलों का प्रसारण कर रहा सबसे बडा नेटवर्क बन जाएगा.
उधर रिलायंस एडीएजी भी अमेरीका के सीबीएस नेटवर्क के साथ गठबंधन कर 3 नए अंग्रेजी भाषी चैनल लॉंच करेगा. इनमें शामिल है अंग्रेजी मनोरंजन चैनल प्राइम, महिलाओं का चैनल लव और युवाओं का चैनल स्पार्क.
ज़ी नेटवर्क की योजना एक गोल्फ आधारित चैनल लॉंच करने की है. यह नेटवर्क एक फुटबॉल आधारित खेल चैनल भी लॉंच कर सकता है. इस नेटवर्क ने क्रिकेट के लिए विशेष चैनल टैन स्पोर्ट्स क्रिकेट पहले ही लॉंच कर दिया है. भारत के इस सबसे लोकप्रिय खेल पर आधारित अब 3 चैनल - स्टार क्रिकेट, नीयो क्रिकेट और टैन क्रिकेट प्रसारित हो रहे हैं.
तो क्या भारतीय दर्शकों की मांग बदल रही है?
मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा हो रहा है. अब डीटीएच का जमाना है और दर्शक अपनी पसंद के हिसाब से पैकेज चुनने को स्वतंत्र है. इसलिए अब कारों और बाइकों में गहन रूचि रखने वाले दर्शक जहाँ टर्बो चैनल देख रहे हैं तो अन्य दर्शक साइंस चैनल और फॉक्स क्राइम भी देख रहे हैं. सबको अपनी पसंद के विषय पर आधारित कोई ना कोई चैनल तो मिल रहा है.
भारत में टीवी विज्ञापनों का 1/6 हिस्सा विषय आधारित चैनलों के लिए आरक्षित रखा जाता है. इन चैनलों का प्रबंधन खर्च काफी कम होता है इसलिए इनकी प्रसारण लागत को वसूलना आसान होता है. अधिकतर नेटवर्क अपने पहले से तैयार कार्यक्रम भारत में दिखा रहे हैं, इसलिए उनकी लागत काफी घट जाती है.
एक मीडिया विश्लेषक के अनुसार - हिन्दी मनोरंजन चैनल शुरू करना काफी महंगा सौदा है. इसमें भारी खर्च आता है और रिस्क भी काफी होती है. एक बार हिन्दी चैनल शुरू होते ही आप उसमें फंस जाते हैं और कहीं और ध्यान नहीं दे पाते. जबकि विषय आधारित चैनलों को चलाने का खर्च कम आता है और आपको अपने सारे संसाधन झोंकने की आवश्यकता भी नहीं होती.
भारत में अभी करीब 500 के आसपास टीवी चैनल प्रसारित हो रहे हैं. आगामी वर्षों में यह संख्या तेजी से बढ सकती है.

