मलेरिया रोग का उद्भव कब से हुआ? यह रोग कितना पुराना है? इस सवाल का जवाब ढूंढते समय वैज्ञानिक उस समय हैरान रह गए जब उन्हें यह पता चला कि मलेरिया और इंसानों का नाता दशकों या सैंकडो वर्ष नहीं बल्कि हजारों वर्ष पुराना है. मलेरिया आज सबसे घातक बिमारियों में से एक बनी हुई है. हर वर्ष 23 करोड़ से अधिक लोग मलेरिया के शिकार होते हैं और 10 से 30 लाख लोग हर वर्ष इस रोग से मारे जाते हैं. करीब 1.4 अरब लोगों को यह रोग होने का खतरा हर समय बना रहता है. जाहिर है मलेरिया एक कम प्रचारित परंतु बेहद घातक रोग है. और यह रोग इंसानों को हजारों वर्षों से होता आया है.
लंडन की इम्पीरियल कॉलेज के शोधकर्ताओं के अनुसार यह मानने में कोई भूल नहीं है कि मलेरिया का विकास इंसानों के विकास के साथ साथ हुआ था और 60 से 80 हजार वर्ष पहले जब हमारे पूर्वज अफ्रीका से दुनिया के अन्य इलाकों में फैले थे तब मलेरिया का रोग भी उनके साथ फैला था.
इस शोध से जुड़े फ्रेंकोइज़ बलोक्स के अनुसार - हमारी शोध बताती है कि मलेरिया के किटाणुँ इंसानों के साथ साथ विकसित हुए और दुनिया भर में फैले. यह सब कुछ लगभग 80 हजार वर्ष पहले हुआ होगा.
इस शोध के लिए शोधकर्ताओं ने मलेरिया पेरासाइट्स के बहुत बडे नमूनों पर परीक्षण किया. इन पेरासाइट्स की डीएनए सिक्वेंसिंग करने के बाद उन्होनें यह जानने की कोशिश की कि मलेरिया के जीवाणुँ अलग अलग प्रदेशों में किस तरह से विकसित हुए और उनकी उम्र क्या रही होगी.
वैज्ञानिकों ने पाया कि इन पेरासाट्स की जिनेटिक विविधता का संबंध उनकी अफ्रीका से दूरी से बनता है, ऐसा ही कुछ इंसानों के पूर्वजों के अवशेषों के परीक्षणों से भी पता चलता है. इससे साबित होता है कि मलेरिया के जीवाणुँ उतने ही पुराने हैं जितने इंसान. उनका विकास भी इंसानों के साथ ही हुआ है. करंट बायोलोजी में प्रकाशित इन शोध नतीजों से भविष्य में मलेरिया से लडने के लिए दवाईयाँ बनाने में मदद मिलेगी.

