एक शोध से पता चला है कि आम धारणा के विपरित मोबाइल फोन के टावरों और नवजात शिशुओं को होने वाले कैंसर जैसे प्राणघातक रोग के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है. मोबाइल फोनों के बढ रहे इस्तेमाल के साथ ही आज कल जगह जगह मोबाइल फोन के टावर दिखाई देने लगे हैं और इनसे उत्पन्न खतरों के विषय में तरह तरह की बातें लिखी जा रही है और इनकी वजह से स्वास्थ्य सबंधित परेशानियों को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. चिंताएँ तब बढ जाती है जब मोबाइल टावरों की वजह से कैंसर जैसे प्राणघातक रोग के होने की सम्भावना जताई जाने लगती है. इस सर्वे से पता चला कि मोबाइल टावरों को लेकर लोगों के मन में कई प्रकार की भ्रांतियाँ हैं और उन्हें डर लगा रहता है कि इन टावरों की वजह से उनके तथा उनके नवजात शिशु के स्वास्थ्य पर कोई गम्भीर खतरा आ सकता है. ऐसे डर अमूमन उन रिपोर्टों से उत्पन्न होते हैं जिसमें कहा जाता है कि मोबाइल टावर खतरनाक विकिरण फैलाते हैं जिनसे कैंसर हो सकता है. परंतु सच यह है कि इस विषय पर रेडियोबायोलोजिकल अध्ययन काफी कम किया गया है.
अब इम्पीरियल कॉलेज, लंडन के शोधकर्ताओं ने अपनी एक नई शोध के माध्यम से इस विषय पर अधिक प्रकाश डाला है. इस शोध के दौरान यह पता लगाया गया कि नवजात शिशुओं को आम तौर पर होने वाले कैंसर जैसे कि ल्यूकेमिया और ब्रैइन कैंसर का संबंध उनके नजदीकी मोबाइल टावर से है या नहीं.
इसके लिए शोधकर्ताओं ने 1397 ऐसे बच्चों का अध्ययन किया जो 4 वर्ष की उम्र तक के थे और जिन्हें कैंसर हुआ था. अध्ययन का पैमाना 1999 से लेकर 2001 के आँकडो पर आधारित था. शोधकर्ताओं ने इन आँकडों का मिलान मोबाइल फोन बेस स्टेशन और एंटिना की उपलब्धता से किया जो 1996 से लेकर 2001 तक लगाए गए थे.
शोधकर्ताओं ने इन बच्चों के जन्मस्थान और उसके नजदीकी मोबाइल टावर के आँकडों का विश्लेषण किया. उन्होनें यह जाँच की कि अमुक बच्चे के जन्मस्थान से 700 मीटर से लेकर 1400 मीटर की दूरी तक कितने मोबाइल टावर थे. इस शोध से शोधकर्ताओं ने पाया कि बच्चों में होने वाले कैंसर और मोबाइल टावर की मौजूदगी के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है.
परंतु यह शोध मात्र नवजात शिशुओं तक ही सीमित थी और जाँच का दायरा भी शुरू के 4 वर्ष तक ही सीमित था इसलिए यह कहना मुश्किल है कि लम्बे जीवन काल के दौरान मोबाइल टावरों से स्वास्थ्य सबंधि कोई परेशानी उत्पन्न होती है या नहीं.

