Monday, Feb 13th

अंतिम अपडेट:04:05:04 AM IST

क्यों होता है जेटलैग? क्या हैं उपाय

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jetlagलगातार एक देश से दूसरे देश की उडान भरने वाले लोगों को जेटलैग़ का अनुभव होता है. सूर्य की प्रदक्षिणा कर रही पृथ्वी की वजह से हमें ऐसा प्रतित होता है कि सूर्य पूर्व से उग कर पश्चिम में अस्त होता है. यह प्रक्रिया पूरे वर्ष चलती रहती है. हर देश में ऐसा होता है परंतु भौगोलिक स्थिति अलग अलग होने की वजह से जब यहाँ सूर्योदय होता है तो अमेरिका में लगभग सूर्यास्त हो चुका होता है. इसके लिए हर देश का अपना एक टाइमजोन होता है.

यदि कोई देश आकार में बड़ा हो तो उस देश में कई सारे टाइमजोन हो सकते हैं, उदाहरण के लिए अमेरिका में 4 तो रूस में तो 11 टाइमजोन हैं.

इन देशों में स्थानीय उडान भरने वाले लोगों को भी जेटलैग की शिकायत हो जाती है. जेटलैग का असर शरीर पर पड़ता है. इससे अनिद्रा की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, भूख मर जाती है, सक्रीयता कम हो जाती है और मन अप्रसन्न रहने लगता है.

यह तो पहले से ही ज्ञात है कि अलग अलग टाइमजोनों से गुजरते समय शरीर समय के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता और उसकी वजह से जेटलैग का अनुभव होता है. जेटलैग जैसा ही असर बार बार अलग अलग पालियों (शिफ्ट) में काम करने वाले लोगों पर भी पडता है. अब इसके पीछे का वैज्ञानिक आधार अब ग्रेगर आइकल और मैक्स प्लांक ने खोजा है. ये दोनों जर्मनी के संस्थान बायोफिजिकल कैमिस्ट्री से जुडे हैं.

उनकी शोध बताती है कि जेटलैग की वजह से हमारे शरीर के कुछ अति आवश्यक होर्मोन के निर्माण की प्रक्रिया बाधित होती है. शरीर इन होर्मोन के उत्पादन की गति को संतुलित नहीं रख पाता है और इस वजह से जेटलैग का अनुभव होता है.

इस शोध से प्राप्त आँकडों की मदद से जेटलैग के निवारण संबंधित दवाईयाँ तैयार की जा सकती है. जेटलैग का असर यूँ तो स्वत: ही ठीक हो जाता है परंतु इसकी वजह से हृदय सबंधि बिमारियाँ, स्तन कैंसर और कुछ अन्य बिमारियाँ भी लग सकती है.

इसलिए इस विषय पर और अधिक शोध कर इसके निवारण के उपाय खोजना आवश्यक है. परंतु वैज्ञानिकों का एक तबका इसके खिलाफ है. उनका मानना है कि जेटलैग जैसी समस्या का हल शरीर स्वयं खोज लेता है और धीरे धीरे अभ्यस्त हो जाता है. कृत्रिम रूप से इस प्रक्रिया को बाधित करने से शरीर को नुकसान ही होगा.

जेटलैग से बचने के लिए क्या करें?
  • जिस देश की यात्रा पर जा रहे हों उस देश के टाइमजोन के हिसाब से खुद को ढालना पहले से शुरू कर दें. यदि ऑस्ट्रेलिया जा रहे हों तो जल्दी उठना शुरू कर दें और अमेरिका जा रहे हों दिन में थोडा अधिक सोकर रात को देर तक जागने की आदत डालें.
  • यात्रा से पहले काफी तरल पीएँ. कैफिन का कम से कम सेवन करें
  • फ्लाइट पकड़ते समय अपनी घड़ी का समय अपने गंतव्य स्थान के समयानुसार कर लें
  • फ्लाइट में अपने गंतव्य स्थान के अनुसार खुद को ढालने का प्रयास करें. अगर आपके गंतव्य स्थान पर अभी रात है तो सोने की कोशिश करें.
  • अपने गंतव्य स्थान पर पहुँचने के बाद खुद को सक्रीय रखें. कसरत करें.
  • कुछ दिन तक हल्का आहार लें.
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