यह लेख उन नवविवाहित जोड़ों के लिए उपयोगी है जिनकी हाल ही में शादी हुई है और जो अपने अंतरंग जीवन के प्रति चिंता और तनाव महसूस कर रहे हैं.
एक सर्वे के नतीजे बताते हैं कि भारत की 35% महिलाओं में विवाह के बाद या विवाह से कुछ समय पहले सेक्स के प्रति डर उत्पन्न हो जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे समाज में इस विषय पर खुल कर बात करने की आज़ादी नहीं है और फिर बचपन में हुई कुछ अवांछित घटनाओं की याद भी इसके लिए जिम्मेदार है.
इस विषय पर सेक्सोलोजिस्ट पारस शाह के अनुसार युगल अपने शुरूआत सह-जीवन को आनंदमय बनाने के लिए निम्नलिखित कुछ बातों पर गौर कर सकते हैं.
सामान्य रहें:
सेक्स को किसी "खास" चीज के तौर पर ना लें. यह एक प्राकृतिक और नैसर्गिक क्रिया है. अपने साथी के सहज सहजता से पेश आएँ और उसकी रूचि का ध्यान रखें. कुछ "विशेष" करने का प्रयत्न ना करें और सबकुछ सामान्य तौर पर होने दें. यदि आप जबरदस्ती कुछ भी करने का प्रयत्न करेंगे तो आपका साथी उसे पहचान जाएगा और उससे तनाव उत्पन्न होगा.
विविधता की तलाश ना करें:
कुछ पुरूष विवाह से पूर्व कई प्रकार के पूर्वाग्रह से ग्रसित हो जाते हैं. उनमें से एक है अपने साथी को अलग अलग तरह से संतुष्टि देना. उनके मन में होता है कि अपनी पत्नी को शारीरिक रूप से संतुष्टि प्रदान करने के लिए उन्हें हमेशा कुछ नया करना होगा. परंतु यह धारणा गलत है. सेक्स का सीधा संबंध मन से होता है. सेक्स जितनी शारीरिक क्रिया है उतनी ही मानसिक भी. सहज रहें, ना कि कुछ नया करने के चक्कर में तनाव उत्पन्न करें.
विचारों को त्याग दें:
महिलाएँ प्रेम पाने के लिए सेक्स में लिप्त होती हैं, यह एक आम धारणा है जो काफी हद तक सही भी है. पुरूष और महिला की सेक्स के प्रति अवधारणा अलग अलग होती है और इससे कई बार तनाव उत्पन्न होता है. इससे बचने के लिए सेक्स के प्रति अति सवेंदनशील होने से बचें. जब आप अपनी पत्नी के साथ हों तो अपना ध्यान उन पर रखें. आज "क्या नया", ऐसे विचार त्याग दें.
अपने प्रति पूर्वाग्रह ना रखें:
यह बात विशेष रूप से महिलाओं पर लागू होती है. महिलाएँ अपनी सुंदरता के प्रति पुरूषों की अपेक्षा अधिक सवेंदनशील होती हैं. परंतु अत्यधिक सवेंदनशीलता रिश्तों में तनाव ला सकती है. इसलिए इस बात की चिंता ना करें कि "मैं कैसी लग रही हूँ". किसी भी प्रकार की नकारात्मक सोच सेक्स जीवन के लिए हितावह नहीं है.
समय पर छोड़ दें:
पोर्न फिल्मों में क्या दिखाया गया है या फिर कामसुत्र क्या कहता है इसकी चिंता छोड़ दें. जब आप अपने साथी के साथ हों तब हर एक क्षण का आनंद उठाने का प्रयत्न करें. अधिक से अधिक बात करें और उनके ईच्छाओं और अनिच्छाओं को जानने का प्रयास करें. सेक्स को समय पर छोड़ दें.
अपने साथी से सीखें:
यह एक ऐसी क्रिया है जिसमें लिप्त होकर ही उसके बारे में जाना जा सकता है. समय के साथ आप अपने साथी की ईच्छाओं और अनिच्छाओं के बारे में जानने लगेंगे. आवश्यक यह है कि आप ना केवल खुद से बल्कि अपने साथी की क्रियाओं के माध्यम से हमेशा कुछ ना कुछ नया सीखते रहें.
"सबसे अच्छा" कुछ नहीं:
इस दुनिया में कुछ भी "सबसे अच्छा" नहीं होता! इसलिए यह चिंता छोड़ दें कि आपका सेक्स जीवन अच्छा है या नहीं. या फिर यदि अच्छा है तो सबसे अच्छा है या नहीं.
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