यह समस्या अधिकतर वैवाहिक जोडों के सामने उपस्थित होती है. समस्या है अलग अलग सेक्स ड्राइव की. हर व्यक्ति भिन्न होता है और उसी तरह से भिन्न होती है आकांक्षाएँ. सेक्स के मामले में इस तरह का तालमेल बिठाना और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि ऐसा ना होने से वैवाहिक जीवन तनाव से भर जाता है.पुरूष और महिला की सेक्स संबंधित ईच्छाएँ और आकांक्षाएँ अलग होती है. पुरूष आम तौर पर सेक्स के प्रति अधिक उत्साहित होते हैं. परंतु आज की तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी की वजह से हमारी दिनचर्या में इस तरह के बदलाव आ रहे हैं कि जिससे ये आम मान्यताएँ भी गलत साबित हो रही हैं.
दिनभर काम के तनाव में समय बीताने वाले पुरूष के लिए घर आने के बाद सेक्स के लिए तैयार होना कठीन हो जाता है. उसी तरह से घर के कार्यों में उलझी महिलाएँ भी कुछ इसी तरह का अनुभव करती हैं. तो ऐसे में सेक्स का संतुलन कैसे स्थापित किया जा सकता है?
कुछ उपाय हैं जिनपर अमल किया जा सकता है -
बेडरूम के बाहर भी सोचें:
सबसे पहला बदलाव यह हो सकता है कि सेक्स को थोपा ना जाए. शयनकक्ष के बाहर भी एक दूसरे के प्रति प्रेम दर्शाया जा सकता है. एक दूसरे को भरपूर समय देने, उसके काम में मदद करने और एक दूसरे की रूचि का ध्यान रखने से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है. आप रसोई में अपनी पत्नी की मदद कर सकते हैं, साथ - साथ किताब पढ सकते हैं, घर की सफाई कर सकते हैं, तथा विंडो शोपिंग के लिए भी निकल सकते हैं. ऐसे में आप दोनों के पास एक दूसरे के करीब आने और प्रेम करने के कई अवसर प्राप्त होते हैं. बात इतनी सी है - शयनकक्ष के बाहर भी सोचें.
अपने साथी की जरूरतों को समझें:
अच्छे वैवाहिक जीवन के लिए आवश्यक है कि एक दूसरे की आवश्यकताओं को महत्व दिया जाए. यदि कभी घर पर काम अधिक हो तो अपनी पत्नी से रात्री के समय अंतरंग संबंध बनाने की अपेक्षा नहीं की जा सकती. यही बात पुरूषों पर भी लागू होती है. इसलिए अपने साथी को उनके आराम के लिए पूरा समय देना और उनकी जरूरतों का ध्यना रखना काफी आवश्यक होता है. इसके लिए कभी कभी अपनी यौनिच्छाओं को दबाना भी पडता है. परंतु इसका परिणाम सुखद होता है.
खुलकर अपने विचार रखें :
यह बात महिलाओं पर अधिक लागू होती है. हमेशा अपने साथी की ही नहीं बल्कि अपनी और अपने स्वास्थ्य की बात भी सोचें. अपने विचार खुलकर रखें. यदि आप सेक्स के लिए तैयार नहीं हो पा रही हैं तो बेहतर है कि अपने साथी को इस बात से अवगत कराएँ, ना कि उनकी खुशी के लिए जबरदस्ती तैयार हों. इसी तरह से सेक्स की ईच्छाओं को प्रगट करने के भी कई तरीके हो सकते हैं. चुँकि आप अपने साथी के बारे मं सबसे अधिक जानते हैं इसलिए आपको ही पता होगा कि आप अपनी बात सही तरह से कैसे रख सकते हैं. हडबडी और अति-आग्रह हितावह नहीं होता.
प्यार की भी गुंजाईश:
व्यस्त दम्पत्ति कई मौकों पर सेक्स की बजाय केवल फोरप्ले का आनंद भी ले सकते हैं. और इसके लिए उन्हें शयनकक्ष में बंधने की आवश्यकता भी नहीं होती. पल दो पल का प्यार भरा स्पर्श भी जादू कर सकता है.
सेक्स ही सबकुछ नहीं:
आँख बंद कर सोचिए कि आप सेक्स के बिना कितना समय अपने साथी के साथ गुजारते हैं. क्या आप साथ में टहलने जाते हैं, बातचीत करते हैं, साथ में किताब पढते हैं, रसोई में मदद करते हैं, उनकी बात को सुनते हैं... वैवाहिक जीवन में ये छोटी छोटी बातें ही बडा असर ला सकती हैं.

