क्या एक जमाना ऐसा आएगा जब लोग प्राकृतिक गर्भधारण को महत्व देना बंद कर देंगे और संतानोत्पति के लिए कृत्रिम माध्यमों का सहारा लेना आम बात हो जाएगी? यदि कुछ शीर्ष वैज्ञानिकों और चिकित्सकों की मानें तो ऐसा ही है. कृत्रिम तरीकों जैसे कि IVF तकनीक की मदद से संतानोत्पति करने का चलन बढ रहा है और नई पीढी प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण करने के प्रति उदासिनता दिखा रही है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी. युगल अपने कैरियर के लिए कई वर्ष खपा देते हैं. विवाह के बाद दंपत्तियों पर काम का इतना बोझ होता है कि वे संतानोत्पति के बारे में सोचते भी नहीं. और जब तक उनमें संतान की चाह उत्पन्न होती है तब तक उनकी उम्र उनका साथ नहीं दे पाती.
आजकल के व्यस्त युगल 30 और 40 वर्ष के बाद संतान की कामना करते हैं. इस उम्र में महिलाओं के द्वारा गर्भधारण करना मुश्किल हो जाता है.
आईवीएफ तकनीक के माध्यम से कम्प्यूटर संचालित स्टोरेज सुविधा की मदद से भ्रुण का विकास और फिर गर्भधारण 50% से अधिक की सफलता दर के समीप पहुँच रहा है. युगलों को यह तकनीक पसंद आ रही है क्योंकि इस तकनीक की मदद से वे अधिक उम्र में पहुँचने के बाद भी आसानी से संतानोत्पति कर पाते हैं, जबकि युवा दंपत्ति को प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में दिक्कत आ सकती है.
उदाहरण के लिए 18 से 26 उम्र के बीच की महिलाओं के लिए प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करना सरल रहता है. परंतु एक रिपोर्ट के अनुसार प्रति माह इस उम्र की महिला के द्वारा नियमित सेक्स के बाद भी गर्भधारण करने की सम्भावना केवल 25% तक रहती है. जबकि आईवीएफ तकनीक की सहायता से इससे कहीं अधिक उम्र की महिलाएँ संतान की उत्पत्ति कर पाती हैं और सफलता दर भी प्राकृतिक गर्भधारण दर से कहीं अधिक होती है. जबकि 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिला द्वारा प्राकृतिक रूप से गर्भधारण कर पाने की सम्भावना केवल 10% की होती है.
आईवीएफ तकनीक और भी अधिक लोकप्रिय होगी क्योंकि भविष्य में अधिकाधिक युगल ऑफिसों में काम करेंगे और उनके लिए कम उम्र में अभिभावक बनना सम्भव नहीं होगा. दूसरी तरफ लेबोरेटरी परीक्षणों के दौरान आईवीएफ तकनीक की मदद से जानवरों के भ्रुण विकास में 100% सफलता पाई जाने लगी है. इससे उम्मीद जगी है कि भविष्य में इंसान भी आएवीएफ तकनीक से संतानोत्पति करने में शत प्रतिशत तक सफल होने लगेंगे.
इससे प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने की दर और भी कम होगी.

