आज के जमाने के किशोर कम उम्र से ही सेक्सुअल गतिविधियों में संलिप्त होने लग जाते हैं. क्या इसके लिए मीडिया दोषी है?
क्या इंटरनेट, पुस्तकों और मोबाइल फोन पर आसानी से उपलब्ध सेक्स संबंधित सामग्रियों से उनका भावनाएँ प्रभावित हो रही हैं? आज तक हुई अधिकतर शोधों और विशेषज्ञों की राय पर गौर करें तो ऐसा ही है. अधिकतर मनोचिकित्सक इस बात को लेकर अपनी सहमति व्यक्त करते थे. परन्तु एक नई शोध इसे सही नहीं मानती.इस नई शोध के अनुसार किसी किशोर के द्वारा कम उम्र मे ही सेक्सुअल गतिविधियों में अत्यधिक सक्रीयता दिखाने के लिए मीडिया को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है. एक मनोचिकित्सक लौरेंस स्टीनबर्ग ने 2006 में पेडियाट्रिक में प्रकाशित हुई एक संबंधित शोध रिपोर्ट की फिर से गहन जाँच की और उसमें निहित गलतियों को उजागर किया.
इस रिपोर्ट में लिखा गया था कि 12 से 14 वर्ष के जो किशोर फिल्म, टीवी या पत्रिकाओं के माध्यम से भारी मात्रा में सेक्सुअल सामग्री पढता या देखता है वह 16 वर्ष की आयु आते आते सेक्सुअल गतिविधियों में शामिल हो जाता है. इस तरह से किशोर अल्पायु में ही असुरक्षित यौन संबंध बनाने लगते हैं.
परंतु स्टीनबर्ग ने अपनी जाँच रिपोर्ट में लिखा कि इस शोध रिपोर्ट पर काम कर रहे शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण तथ्य की तरफ ध्यान ही नहीं दिया. तथ्य यह है कि जो किशोर सेक्स के प्रति अति उत्साहित है या फिर जिसकी रूचि पहले से ही सेक्स में है वह सेक्स संबंधित अधिकाधिक सामग्रियाँ देखता या पढता है. यानी कि मीडिया उसे प्रभावित नहीं करता बल्कि वह इस विषय पर आधारित मीडिया का अधिक इस्तेमाल करता है. एक तरह से यह ऊल्टे असर जैसा है जहाँ मीडिया किसी व्यक्ति को प्रभावित नहीं कर रहा बल्कि किसी एक विशेष विषय में गहरी रूचि रखने वाला व्यक्ति मीडिया को प्रभावित करता है.
स्टीनबर्ग ने अपनी जाँच रिपोर्ट की वैधता को प्रमाणित करने के लिए सर्वे मे शामिल किशोरों के जीवन के अन्य पहलूओं को भी छूआ और जाना कि उनका स्कूल रिकॉर्ड क्या कहता है, वे पढाई में कैसे हैं, उनके अभिभावकों के आपसी संबंध कैसे हैं, वे कितने धार्मिक हैं और उनका अपने मित्रों के प्रति व्यवहार कैसा है आदि.
इस गहन जाँच से पता चला कि जो किशोर अन्य विषयों में अधिक रूचि रखते हैं, जिन्हें अपने करियर की अधिक चिंता है तथा जो किशोर अच्छे सामाजिक वातावरण से आते हैं उनपर इस तरह की मीडिया का कोई असर नहीं होता. इसस स्टीनबर्ग की इस जाँच रिपोर्ट की वैधता प्रमाणित होती है कि - किशोरों के द्वारा कम उम्र में यौन संबंध स्थापित करने के लिए मीडिया "ही" दोषी नहीं है, याँ मीडिया "भी" दोषी हो सकता है.

