| 26/11 मुम्बई हमला: | |
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वे लोग नाव में बैठ कर आए थे, ठीक हमारी सुरक्षा एजेंसियों की नाक के नीचे. वे बेखौफ थे और हमारी पुलिस उलझन में थी. उनके पास अत्याधुनिक हथियार थे और काफी मात्रा में थे, हमारे सुरक्षा अधिकारियों के पास बंदुकें भी नहीं थी. आला अधिकारी आए तो उनके पास ढंग की बुलेटप्रुफ जैकेट भी नहीं थी. एटीएस चीफ की मृत्यु गोली लगने से हुई और वह गोली उनकी बुलेटप्रुफ जैकेट को भेद कर उनके शरीर में गई थी. 3 दिन तक मुम्बई सहित पूरा देश आतंकवादियों के कब्जे में रहा. एनएसजी को भी आतंकवादियों से पार पाने में 60 घंटे लग गए और जब सब खत्म हुआ तो पता चला कि सचमुच में सबकुछ खत्म हो गया है. भारत ने अपनी साख और आत्मविश्वास खो दिया. |
| 1992 के मुम्बई धमाके: | |
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यह देश की आर्थिक राजधानी पर हमला था. टाइगर मेमन और उनके गुर्गों ने बाबरी मस्जिद ध्वंस का बदला लेने के लिए मुम्बई में सीरियल धमाके किए. इस तरह की आतंकी घटना को देश ने पहली बार महसूस किया. |
| कारगिल हमला: |
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वे लोग आराम से नियंत्रण रेखा पार कर देश में घुसे और भारत के ही बनाए बंकरों में अपना अड्डा जमाया. हमारा खुफिया तंत्र सोता रहा और सुरक्षा एजेंसियों को तब तक इस बात की भनक नहीं लगी जब तक एक गरडिए ने इसकी सूचना ना दे दी. इसके बाद भारत ने अब तक की सबसे मुश्किल और हारी हुई लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की. |
| 62 में चीन का हमला: | |
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नेहरू का हिन्दी - चीनी भाई भाई का सपना एक मजाक बनकर रह गया. देश का चीन के प्रति लगाव और अति विश्वास खोखला साबित हुआ और चीन ने मौका पाकर पीठ में छूरा भोंक दिया. देश ने लाखों वर्ग किलोमीटर की जमीन खो दी और इसके साथ ही ईज्जत भी खो दी. |
| संसद पर हमला: |
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यह लोकतंत्र पर हमला था और इसमें पड़ोसी देश से आए आतंकवादियों के साथ साथ कुछ देश के नागरिक भी शामिल थे. संसद पर हमले के समय संसद की भीतर सुरक्षा अधिकारियों के पास हथियार ही नहीं थे लेकिन उन्होने हिम्मत दिखाते हुए संसद के दरवाजे बंद कर दिए. आतंकी गफलत में रहे और अंत में मारे गए. |
| 48 का कश्मीर हमला: |
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कश्मीर किस का? कश्मीर के शासक असमंजस में रहे, और पाकिस्तान ने कबिलाई लड़ाकों की मदद से कश्मीर पर हमला कर दिया. वे अंदर घुसते चले गए और जब श्रीनगर पर आ बनी तो कश्मीर के राजा ने कश्मीर का विलय भारत में कर दिया. लेकिन तब तक पाकिस्तान आधा कश्मीर हड़प कर चुका था. |
| सीरियल धमाके: |
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यह रोज की बात हो चुकी थी. हर दूसरे महिने धमाके. 13 -26 -13 - 26... की तिथियाँ खौफ की तिथियाँ हो गई थी. इसकी शुरूआत जयपुर से हुई और बाद में बंगालुरू, अहमदाबाद और दिल्ली तक खौफ की लहर चलती रही. |
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