7 सबसे खतरनाक कीट -
मक्खियाँ (वेस्पुला जर्मेनिका)

जहाँ गंदगी हो वहाँ मक्खियों का साम्राज्य होता है. ये मक्खियाँ गंदगी के प्रसार में महत्वपूर्ण भाग निभाती है. भारत जैसे देश में जहाँ का मौसम इनके अनुकूल होता है, मक्खियों की भरमार देखी जाती है. यूँ तो इन मक्खियों से कोई विशेष खतरा नहीं होता है परंतु जिन लोगों को इनसे एलर्जी होती है उनके लिए जीना दूभर हो जाता है. एक अनुमान के अनुसार हर साल करीब 50 लोग मक्खियों की एलर्जी से मारे जाते हैं.
एशियन जायंट होर्नेट (Vespa mandarinia)
जापान पहाड़ी इलाकों तथा पूर्वी एशिया में यह दिखाई देती है. यह दुनिया की सबसे बड़ी होर्नेट है जिसकी लम्बाई 2 इंच है और इसके पंख 3 इंच के हैं. इसका कांटा ही .25 इंच जितना होता है और कोई भी नहीं चाहेगा कि यह होर्नेट उस पर हमला करे. इसके काटने से बैचेनी का अहसास होता है. यह कमजोर स्नायूओं को नष्ट कर सकती है और जिन लोगों को मक्खियों से एलर्जी है उनकी मौत भी हो सकती है. प्रति वर्ष करीब 70 लोग इसके काटने से मरते हैं.
अफ्रीका की मधुमक्खी (hybrid Apis mellifera scutellata)

यह मधुमक्खी आम मधुमक्खियों से काफी अधिक खतरनाक होती है. अफ्रीका में पाई जानी वाली इन मधुमक्खियों को कभी ब्राज़ील लाया गया था ताकी इनसे ब्रिडिंग कर अधिक शहद बनाने वाली मधुमक्खियाँ तैयार की जा सके. वह प्रयोग तो असफल रहा, परंतु इससे खतरा यह उत्पन्न हुआ कि ये मधुमक्खियाँ कैद से छूट कर ब्राज़ील के अन्य भागों और दक्षिण अमेरिका तक फैल गई.
ये मधुमक्खियाँ समूह में हमला करती है और उत्तेजित होने पर एक घोड़े जितने बड़े जानवर को गिरा कर मार सकती है. हर साल करीब 1000 लोग इनके काटने से मरते हैं.
किसिंग बग (Triatomines)
इस कीड़े की खोज चार्ल्स डार्विन ने की थी और यह छोटा सा कीडा इंसानों के लिए काफी खतरनाक साबित होता है. इसकी 138 प्रजातियाँ है और यह अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशिया मे पाया जाता है.
यह कीडा हमारे घरों के बाहर और अंदर अपना घर बनाता है. इसके काटने से बेहद खुजली आती है और वह जगह लाल पड़ जाती है. यह कीडा Trypanosoma cruzi नामक एक पेरासाइट को हमारे शरीर में दाखिल कर देता है जिससे कार्डिएक समस्या उत्पन्न हो सकती है. हर वर्ष करीब 45000 लोग इस कीडे के काटने से मरते हैं.
शेशे फ्लाय (Glossina morsitans)
अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान में आम तौर पर पाई जाने वाली यह मक्खी यूँ तो आम मक्खियों जैसी ही दिखती है परंतु है काफी खतरनाक. यह मक्खी जानवरों तथा इंसानों का खून चूसती है. इसके साथ ही यह कुछ खतरनाक पेरासाइट शरीर में दाखिल कर देती है.
इससे बैचेनी होती है और नींद लेने में भी तकलीफ होती है. यदि सही समय पर इलाज ना करवा जाए तो यह महामारी का रूप में ले लेती है और इससे कार्डिएक समस्या भी उत्पन्न होती है. हर साल करीब 3 लाख लोग इस मक्खी के काटने से मरते हैं.
रेट फ्लिज़ (Xenopsylla cheopis)
रेट फ्लिज़ उडने वाला छोटा सा कीडा है जो प्रत्यक्ष रूप से नहीं बल्कि परोक्ष रूप से इंसानों के लिए घातक सिद्ध होता है. यह कीड़ा चूहों जो काटता है. इस प्रकार के अन्य कीडों की तरह इसके काटने से बेहद खुजली उत्पन्न होती है और वह जगह लाल हो जाती है. बहरहाल यह कीडा काटते समय Yersinia pestis बैक्टिरिया चूहों के शरीर में दाखिल कर देता है और इससे ग्रसित चूहे प्लेग और उसके समकक्ष अन्य खतरनाक बिमारियाँ फैला सकते हैं.
14वी शताब्दी में यूरोप में फैली प्लेग महामारी से 35 करोड़ लोग मारे गए थे! उसके बाद भी प्लेग की वजह से लाखों लोग जान गवाँ चुके हैं. आज यह बिमारी मृतप्राय है.
एनोफेलेज़ मच्छर (Anopheles quadrimaculatus)
यह मलेरिया फैलाने वाला मच्छर है. रात गहराते ही यह मच्छर अपने शिकार की तलाश करने लगता है. मादा मच्छर के काटने से मलेरिया नामक घातक रोग हो सकता है. हमें भले ही मलेरिया घातक रोग ना लगे क्योंकि यहाँ मलेरिया का इलाज सम्भव है परंतु गरीब और पिछडे अफ्रीकी देशों के लिए यह एक जानलेवा बिमारी है.
हर साल करीब 50 करोड़ लोगों को मलेरिया होती है और करीब 10 से 30 लाख लोग इस बिमारी की वजह से मारे जाते हैं. मलेरिया दुनिया की 10% आबादी को प्रभावित करती है और इसे फैलाने वाला मच्छर छोटी अंगूली के नाखुन जितना ही होता है.

