एक श्रीलंकाई गेंदबाज के द्वारा जानबूझ कर नो बॉल फेंकने और भारतीय बल्लेबाज विरेन्द्र सहवाग को शतक पूरा ना करने देने का मामला काफी तूल पकड रहा है. इस गेंदबाज ने क्रिकेट के नियम का उल्लंघन नहीं किया परंतु "जेंटलमैन खेल" को शर्मसार जरूर किया और ऐसी यह पहली घटना नहीं है - फरवरी 1948, भारत-वेस्ट इंडिज़, बम्बई
इस टेस्ट मैच के दौरान भारत को जीत के लिए 361 रन चाहिए थे और खेल के 39 मिनट बाकी थे. भारत यह मैच जीत सकता था. परंतु वेस्ट इंडिज़ के खिलाडियों ने खेल को जानबूझ कर धीमा कर दिया. उन्होनें इतना समय बरबाद किया कि भारत मैच जीत नहीं पाया और मात्र 6 रन से मैच ड्रा हो गया.
फरवरी 1979, इग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया, मेलबर्न
तब एकदिवसीय खेलों में 30 यार्ड का नियम नहीं हुआ करता था. ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 4 रन चाहिए थे. इंग्लैंड के कप्तान माइक बियरर्ली ने विकेटकीपर सहित सभी खिलाडियों को बाउंड्री पर लगा दिया था. इसके बाद 30 यार्ड का नियम बना.
1979, ऑस्ट्रेलिया-पाकिस्तान, पर्थ
तब क्रिकेट के "हेंडल्ड द बॉल" नियम को ठीक से व्याख्यायित नहीं किया गया था. ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज एंड्रु हैल्डिक नोन स्ट्राइकिंग पोज़िशन पर थे. एक पाकिस्तानी खिलाडी ने गेंदबाज की तरफ गेंद लुढकाई जो एंड्रु के पास गई. एंड्रु ने बॉल उठाकर गेंदबार सरफराज नवाज को दी. सरफराज़ नवाज ने तुरंत 'हेंडल्ड द बॉल' की अपील की और अम्पायर ने इसे मान्य रखा.
1981, ऑस्ट्रेलिया-न्यूज़ीलैंड, मेलबर्न
न्यूज़ीलैंड को आखिरी गेंद पर एक छक्का चाहिए था और वे मैच को टाई कर लेते. ऑस्ट्रेलियन कप्तान ग्रेग चैपल ने अपने भाई ट्रेवरी को कहा कि वे अंडराआर्म गेंद फेंके. ट्रेवर ने गेंद को लुढका कर फेंकी जिस पर छक्का मारना असम्भव था. तब ऐसी गेंद फेंकना नियमानुसार गलत नहीं था, पर इससे खेल भावना को चोट पहुँची.
2005, ज़िम्बाब्वे-न्यूज़ीलैंड, बुलावायो
ज़िम्बाब्वे के बल्लेबाज क्रिस्टोफर मोफू ने रन पूरा किया और तुरंत ही पीच के बीच में आकर अपने साथी खिलाड़ी को 50 रन पूरे करने की बधाई दी. कीवी विकेटकीपर ब्रैंडल मैक्कुलम ने क्रिस्टोफर के छोर की गिल्ली उडा दी और रन आउट की अपील की. वह मान्य भी रखी गई.
2006, न्यूज़ीलैंड-श्रीलंका, क्राइस्टचर्च
एक बार फिर ऐसी ही घटना. इस बार ब्रैंडल मैक्कुलम ने मुतैया मुरलीधरन को तब रन आउट किया जब वे कुमार संगकारा को शतक की बधाई देने क्रीज़ छोड़कर जा रहे थे.
2010, भारत-श्रीलंका, डम्बुला
श्रीलंकाई स्पीनर रणदीव ने जानबूझ कर नो-बॉल फेंकी [अपने करीयर की पहली] ताकी सहवाग शतक लगाने से चूक जाए. भारत को जीत के लिए 1 रन चाहिए था और सहवाग को भी शतक पूरा करने के लिए 1 ही रन चाहिए था. श्रीलंकाई गेंदबाज ने जानबूझ कर भारत को एक रन दे दिया और सहवाग शतक से चूक गए.

