चेहरे पर फेयरनेस क्रीम लगाने से पहले सोचें कि वह बनी किस चीज से है? सौंदर्य प्रसाधनों में कई तरह के रसायनों के अलावा कई ऐसी चीजों का इस्तेमाल होता है जो आप सोच भी नहीं सकते.
मछलियों के स्केल्स [चमड़ी का ऊपरी खोल]:

नाखून पर लगाने वाली पॉलिश, लिपस्टिक, लोशन आदि में चमक होती है. ग्लो लिप्स्टिक लगाकर प्राप्त होने वाली चमक को देखकर प्रसन्न हो रही हों तो ध्यान रखिए कि वह चमक आई किससे है? अधिकतर कम्पनियाँ इसके लिए पर्लसीन का इस्तेमाल करती है जो मछलियों के पंख से प्राप्त होती है.
खराब खाने का तेल:

कई सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली कम्पनियाँ फास्ट फूड रेस्तराँ और कैफे आदि से उनका इस्तेमाल किया गया खाने का तेल एकत्र करती है. खाने के तेल मे6 सर्फकटेंट होता है जिसका इस्तेमाल कॉस्मेटिक्स में होता है.
चिकन बॉन मेरो:

कहा जाता है कि चिकन बॉन मेरो में काफी मात्रा में ग्लुकोसमाइन होता है जो कि चमड़ी को “युवा” बनाए रखता है. इसका इस्तेमाल मोस्चुराइज़र और फेस क्रीम में होता है.
सांड का वीर्य:

जुगुत्सा हो सकती है! वैसे कोड के वीर्य का इस्तेमाल सौंदर्य प्रसाधनों में होता आया है. एक खबर के अनुसार ब्रिटेन के कुछ सलून सांड के वीर्य का इस्तेमाल बालों के जेल बनाने में करते हैं, क्योंकि सांड के वीर्य में ‘अनोखी’ चमक होती है, और उससे दुर्गंध भी दूर होती है.
शिश्न की अग्रचमड़ी [फोरस्कीन]:
शिश्न की अग्रचमड़ी जिसे फोरस्कीन कहा जाता है, उसका इस्तेमाल झुर्रियाँ हटाने वाली क्रीम बनाने में होता है. नवजात शिशु से प्राप्त फोरस्कीन नई चमड़ी बनाने में काफी उपयोगी होती है. चिकित्सा के क्षैत्र में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है और सौदर्य प्रसाधनों में भी.
यूरीया:

यूरीया में पानी को सोखने की गजब की क्षमता होती है. इसमें विटामिन ए, डी, ई और के होता है. यूरीया का इस्तेमाल मोस्चुराइजर, माउथवाश, डिओडोरंट और शेम्पू बनाने में होता है. वैसे यूरीया होता क्या है? प्राकृतिक यूरीया हमारे तथा जानवरों के शरीर से उत्सर्जित पदार्थ है, जो मल तथा मूत्र के रूप में निकलता है.
एम्बरग्रीस:

एम्बरग्रीस व्हेल मछली के पाचन तंत्र में पाया जाता है और इसे व्हेल बाय प्रोडक्ट कहा जाता है. यह सुगंधित होता है और इसका इस्तेमाल इत्र बनाने में होता आया है. वैसे आजकल रसायनिक इत्र अधिक बनाए जाते हैं, इसलिए इसका इस्तेमाल कम हो गया है.

