हालाँकि इनमें से कुछ तकनीकों पर काम 2009 से पहले ही शुरू हो चुका था और कई तकनीकें अभी तक प्रोटोटाइप बनाने तक ही पहुँची है, लेकिन फिर भी यह साल तकनीकी क्षैत्र में हुए विकास के लिए याद रखा जाएगा.
मशीनी एक्सोस्केलेटोन - रीवॉक:
इसमें हड्डियाँ नहीं होती लेकिन स्टील और रबर के पूर्जे जरूर होते हैं. पिछले कुछ वर्षों में मशीनी
एक्सोस्केलेटोन बनाने की तकनीक काफी विकसित हुई है. एक्सोस्केलेटोन इंसान को एक तरह से "महामानव' बना देता है.
और जो लोग चल फिर नहीं सकते उन लोगों के लिए यह तकनीक वरदान साबित हो रही है. इज़रायल के अमित गोफर के द्वारा बनाया गया
रीवॉक इसकी मिसाल है. यह मशीनी एक्स्केलेटोन है जो अपाहिज लोगों को खड़ा होने और चलने फिरने के काबिल बनाता है. इसका वजन 44 पौंड है लेकिन इसके वजन पर मत जाइए क्योंकि इसको पहनने वाले व्यक्ति को इसका अहसास नहीं हो पाता.
स्प्रे करें और सोलर पेनल पाएँ:
सौर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए सोलर सैल सिस्टम खरीदने की जरूरत नहीं रहेगी. आप जहाँ चाहें वहाँ सोलर पेनल स्थापित कर पाएंगे. बस आपको
स्प्रे करना होगा! टेक्सास विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अनोखी तकनीक विकसित की है. इस तकनीक की मदद से नैनोपार्टिकल का छिड़काव कर सोलर पैनल बनाए जा सकेंगे. यह स्याही कोपर इंडियम गैलियम सेलेनाइड से बनी होती है और इसके कण बालों से 10000 गुना अधिक छोटे होते हैं.
स्मार्ट गोली:
यह गोली खाने की नहीं है, बल्कि बंदूक से छोड़ी जाने वाली बुलैट है. यह स्मार्ट इसलिए है क्योंकि यह वहीं फूटती है जहाँ आप चाहते हैं. XM25 नामक इस गोली में माइक्रोचिप्स लगी होती है और यह लेज़र बीम से निर्देशित होती है. सैनिक द्वारा छोड़ी गई यह गोली दिवार भेद कर आगे निकल जाती है और पीछे छीपे दुश्मन को लगती है और फिर धमाका होता है. यह धमाका दिवार पर नहीं होता. और इसलिए यह गोली विशेष है.
हाथों के इशारों से चलाएँ टीवी:
रिमोट कंट्रोल और जोयस्टिक का जमाना गया. अब हाथों के इशारों से टीवी के चैनल बदलिए और आवाज कम या तेज कीजिए. इसी तकनीक की मदद से अपने गेमिंग अवतार को निर्देशित कीजिए. तो अब रिमोट कंट्रोल के खो जाने का गम भूल जाइए.
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सस्ती जीनोम प्रोफाइलिंग:
दुनिया में व्यक्तिगत जीनोम प्रोफाइलिंग का चलन बढ रहा है. इससे किसी भी व्यक्ति के लिए आपातकालीन स्थिति में सही चिकित्सा प्राप्त करना सरल हो जाता है. वर्तमान पद्धति काफी खर्चीली है – करीब 60000 डॉलर. लेकिन फिलाडेल्फिया की नेनोबायोमैट्रिक्स लेब व्यक्तिगत जीनोम प्रोफालिंग का “नैनो” स्वरूप विकसित कर रही है. यह सुविधा मात्र 100 डॉलर में उपलब्ध होगी.
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मोबाइल निजी सहायक:
यह बहुत ही छोटा है और इंसान जैसा तो बिल्कुल नहीं लगता. यह एक सर्च इंजिन है लेकिन एकदम हटके है. वह कैसे? मान लीजिए आप किसी सड़क से गुजर रहे है तो आप सीरी को निर्देश दे सकते हैं कि कोई ऐसी जगह बताओ जहाँ आराम से बैठ कर कॉफी पी जा सके. और बस सीरी आपको वहाँ तक जाने का मार्ग सुझा देगा. आपको ना तो कोई वेबपन्ना खंगालना होगा ना ही सर्च इंजिन द्वारा दी गई असंख्य कड़ियों को छानना होगा. यह तकनीक अगले वर्ष तक आईफोन पर उपलब्ध हो जाएगी और उसके बाद अन्य माध्यमो पर भी.
पेपर डायग्नोस्टिक टेस्ट:
अब आपको अपने खून की जाँच के लिए किसी लैब में जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी. हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ज्योर्ज वाइटसाइड्स ने ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे समूची लैबोरेटरी कागज के टुकड़े में समा गई है. यह कागज असंख्य माइक्रो फ्ल्डिक्स से बना है. इसके एक सीरे पर रक्त या मूत्र के सेम्पल को लगाया जाता है. इससे रक्त के कण इस कागज में बने चैनल में से प्रवाहित होते हैं और वहाँ बनी दिवालों पर लगे अनेकों रसायनों के सम्पर्क में आते हैं. इससे होने वाले रिएक्शन से कागज पर लाल, पीले, नीले और हरे रंग के वर्ग उभरते हैं. इनका संज्ञान लेकर बिमारी का पता लगाया जा सकता है. यह तकनीक गरीब देशों के लिए अति उपयोगी है.