Monday, Feb 13th

अंतिम अपडेट:04:05:04 AM IST

जानिए फुटबॉल : ऑफसाइड का विचित्र नियम

Print PDF
linesman_offsideफुटबॉल सहित कुछ अन्य खेलों में ऑफसाइड का एक नियम लागू है, जो खिलाडियों को कुछ अमुक परिस्थियों में खेल को बढाने से रोकता है.

फुटबॉल के संदर्भ में देखें तो आईएफएबी के लॉ ऑफ द गेम के अंतर्ग नियम 11 में इसकी व्याख्या दी गई है, जो अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल संघ के द्वारा मान्य रखी गई है.

ऑफसाइड पोजिशन क्या होती है?
फुटबॉल के खेल के दौरान किसी खिलाडी को उस परिस्थिति में ऑफसाइड स्थान पर माना जाता है जब वह अपने विरोधी दल की गोललाइन के करीब हो और गेंद तथा विरोधी दल का दूसरा सबसे निकटतम खिलाड़ी उसके पीछे हो.

आसान शब्दों में - यदि "क" टीम का खिलाड़ी "ख" टीम के भाग में घुसकर उस टीम की गोल लाइन के करीब पहुँच जाए और उसके पास बॉल ना हो, और "ख" टीम के गोलकीपर को छोड़ कर अन्य कोई भी खिलाड़ी उसके आगे खड़े ना हों, तथा "क" टीम का वह खिलाड़ी अपने किसी अन्य साथी से पास के द्वारा गेंद प्राप्त करे तो यह ऑफसाइड माना जाता है. ऐसी सूरत में "क" टीम का वह खिलाड़ी खेल को आगे नहीं बढा सकता है.

offside

[उपरोक्त चित्र में लाल रंग के निशान "क" टीम के तथा नीले रंग के निशान "ख" टीम के हैं. क टीम का खिलाड़ी नम्बर 11, 10 नम्बर के साथी को पास दे रहा है. उसे आगे "ख" टीम का गोलची है परंतु बाकी के खिलाड़ी पीछे हैं. इसलिए 10 नम्बर का खिलाड़ी ऑफसाइड में है.]

2005 में की गई व्याख्या में बदलाव के तहत यह माना गया कि "विरोधी दल की गोललाइन के समीप" होने का अर्थ है उस खिलाड़ी का सिर, पैर या शरीर का कोई भी हिस्सा गोललाइन के करीब हो. इसमें हाथ शामिल नहीं है.

कब ऑफसाइड नहीं माना जाता?
यदि कोई खिलाड़ी अपने आगे खड़े अपने ही दल के खिलाड़ी से गेंद प्राप्त करे तो वह ऑफसाइड में नहीं आती. भले ही उन दोनों खिलाडियों के आगे विरोधी दल के खिलाड़ी हों या नहीं. इसके अलावा यदि किसी खिलाड़ी ने सीधे अपने गोलची से गेंद प्राप्त की है, अथवा कॉर्नर किक या साइड थ्रो से गेंद प्राप्त की है तो वह भी ऑफसाइड नहीं मानी जाती.

ऑफसाइड कोई दंडात्मक क्रिया नहीं है. यानी कि यदि कोई खिलाड़ी ऑफसाइड में है ऐसा माना जाए तो भी उसपर कोई कार्रवाही नहीं होती. परंतु यदि कोई खिलाड़ी चेतावनी के बावजूद खेल जारी रखे, विरोधी दल के खिलाड़ी के आगे व्यवधान उत्पन्न करे, उसका ध्यान भंग करे, जानबूझ कर ऑफसाइड में जाए तो उसपर कार्रवाही की जा सकती है.

कौन तय करता है ऑफसाइड:
ऑफसाइड का फैसला मुख्य रैफरी ही करता है परंतु इसके लिए वह साइड रैफरी यानी कि सहायक रैफरी पर निर्भर रहता है. साइड रैफरी मैदान के किनारे खिलाडियों के साथ दौड़ता है. वह हमेशा दूसरी टीम के गोलकीपर के तुरंत बाद वाले खिलाड़ी को निशान बनाकर अपनी स्थिति बनाए रखता है ताकी यदि सामने वाली टीम का कोई खिलाड़ी उस खिलाड़ी से आगे आ जाए और उसके पास गेंद ना हो तो वह ऑफसाइड करार दे सके.

ऑफसाइड ट्रेप:
ऑफसाइड के इस नियम का फायदा उठाकर कई क्लबों और कुछ देशों की टीमों ने अपने विरोधी खेमे को परेशान भी किया था. इसे ऑफसाइड ट्रेप कहा जाता था.

इसमें होता यह था कि जैसे ही किसी टीम की रक्षापंक्ति को लगता कि सामने वाली टीम हावी हो रही है तो वह तुरंत सामने वाली टीम के सबसे आगे खड़े खिलाड़ी से आगे निकल जाते. इससे वह खिलाड़ी भले ही उस टीम की गोललाइन के करीब होता परंतु वह अपने साथी से गेंद प्राप्त नहीं कर पाता.

परंतु बाद में नियमों में कुछ बदलाव कर ऑफसाइड ट्रेप को रोकने का कार्य किया गया. नए नियम के अनुसार यदि कोई खिलाड़ी ऑफसाइड में जाकर गेंद प्राप्त भी करता है तो भी खेल रोका नहीं जाता, तब तक जब तक कि वह खिलाड़ी खेल को आगे ना बढा दे.

इससे ऑफसाइड ट्रेप पर तो लगाम लगी परंतु खेल पेचिदा हो गया. ऑफसाइड वाला खिलाड़ी खेल को आगे बढा रहा है या नहीं यह तय करना साइड रैफरी के ऊपर निर्भर होने लगा. इससे कई बार विवादित स्थिति उत्पन्न हो जाती है.
BLOG COMMENTS POWERED BY DISQUS