फुटबॉल, तथा कुछ अन्य, खेल के दौरान यदि रैफरी को लगता है कि अमुक खिलाड़ी ने कोई नियम तोड़ा है या उसका व्यवहार उचित नहीं है तो वह उस खिलाड़ी को पीले या लाल रंग का कार्ड दिखाता है. इन कार्डों को पैनल्टी कार्ड कहा जाता है. इतिहास:
पैनल्टी कार्ड का विचार ब्रिटेन के फुटबॉल रैफरी कैन एस्टन को आया था. 1966 के फिफा विश्व कप के दौरा एस्टन को फिफा रैफरी समिति का नैतृत्व दिया गया था. एस्टन की जिम्मेदारी थी सभी रैफरियों का प्रतिनिधित्व करना. ब्रिटेन में हुए इस विश्वकप के दौरान ब्रिटेन और अर्जेंटिना के बीच एक मैच हुआ. मैच के दौरान रैफरी रुडोल्फ क्रैलीन ने बॉबी और जैक कार्ल्टन को मौखिक चेतावनी दी. मैच के बाद इंग्लैंड के मैनेजर एल्फ रैमसी ने फिफा से स्पष्टिकरण मांगा की रैफरी ने क्या कहा था?
इस घटना से विवाद उत्पन्न हुआ तो एस्टन को लगा कि कुछ ऐसा होना चाहिए कि रैफरी अपनी बात को स्पष्टता से कह सके और उसे बोलने की आवश्यकता भी ना पड़े. उन्होनें तब अलग अलग रंग के कार्डों का इस्तेमाल करने की बात सोची. उन्होनें ट्रैफिक लाइट के हिसाब से पीले और लाल रंग के कार्ड बनाए. पीला कार्ड चेतावनी के लिए और लाल कार्ड खिलाड़ी को बाहर निकालने के लिए.
1970 के मैक्सिको विश्वकप के दौरान इन कार्डों का पहली बार इस्तेमाल किया गया.
पीला कार्ड:
रैफरी के द्वारा पीला कार्ड तब दिखाया जाता है जब किसी खिलाड़ी को चेतावनी देनी हो. इस सूरत में दोषी खिलाड़ी की जानकारी रैफरी एक नोटबुक में लिख लेता है. इसे बुकिंग कहते हैं. चेतावनी प्राप्त करने वाला खिलाड़ी आगे खेल सकता है, परंतु यदि वह फिर कोई गलती करता है तो उसे बाहर निकाल दिया जाता है. अगर कोई खिलाड़ी निकाला जाता है तो उसके बदले कोई सबस्टिट्यूट खिलाड़ी नहीं खेल सकता है.
कब दिखाया जाता है पीला कार्ड?
- खेल की भावना के विपरित व्यवहार
- गाली देना या मारना
- खेल के नियमों की अनदेखी करना
- खेल शुरू करने में देरी करना
- कोर्नर किक और फ्री किक के लिए आवश्यक दूरी को ना मानना
- रैफरी की अनुमति के बिना खेल शुरू करना
- रैफरी की अनुमति के बिना खेल छोड़कर बार बार बाहर जाना
लाल कार्ड:
लाल कार्ड तब दिखाया जाता है जब खिलाडी ने कोई गम्भीर गलती की हो. ऐसे खिलाड़ी को मैदान से बाहर भेज दिया जाता है. वह वापस मैच में नहीं खेल सकता है और कोई अन्य खिलाड़ी उसकी जगह भी नहीं ले सकता है.
कब दिखाया जाता है लाल कार्ड?
- गम्भीर अभद्र व्यवहार
- हिंसा
- किसी खिलाड़ी पर थूकना
- विरोधी दल के खिलाड़ी के द्वारा गोल करने की सम्भावना होने पर उसे पकड़ना या गिराना
- किसी का अपमान करना
- दूसरी बार पीला कार्ड प्राप्त करना

