8. सेंट्रल अफ्रीका रिपब्लिक

करीब 50 वर्ष पहले सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक को फ्रांस से आजादी मिली थी परंतु उसके बाद से इस देश की हालत बद से बदतर ही हुई है. आज इस देश की कमान फ्रेंकोइज़ बोजिजि की हाथ में है जिन्हें मात्र अपने छोटे से समूह की अधिक चिंता है. 2007-08 में सरकार विरोधी गुटों के साथ हुए समझौते के बाद यह उम्मीद जगी थी कि अब इस देश में शांति लौट आएगी परंतु ऐसा हुआ नहीं.
9. गीनिया

2008 में गीनिया के राष्ट्रपति की मृत्यु के बाद सेना ने सत्ता पर कब्जा कर लिया और मुसा दादिज कमारा को देश की कमान सौंप दी. कमारा ने अपनी अत्याचारी नीतियों के साथ देश में उसके तथा सेना के विरूद्ध उठने वाली हर आवाज को मजबूती से कुचल दिया. सितम्बर 2009 में एक स्टेडियम के भीतर विरोधी दल के करीब 150 लोगों की सामुहिक हत्या की गई. इससे गीनिया की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भ्रत्सना होने लगी. कुछ महिनों बाद कमारा के एक अंगरक्षक ने उसको गोली मार दी. कमारा बुरी तरह से घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए देश से बाहर ले जाया गया. इस बीच देश की जनता के पास कोई और विकल्प नहीं था. वहाँ अराजकता की स्थिति बनी रही.
10. पाकिस्तान

पाकिस्तान को दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक माना जाता है और इसे दुनिया में आतंकवाद की फैक्ट्री के तौर पर भी देखा जाता है. पाकिस्तानी का पश्चिमोत्तर कबायली इलाके पर पाकिस्तान की चुनी हुई सरकार का नहीं परंतु कबीलों का राज चलता है और वे आतंकवाद को खुले तौर पर समर्थन देते हैं. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के ऊपर अत्याचार किए जाते हैं और विगत वर्षों में उनकी संख्या में भारी कमी आई है. पाकिस्तान पर लगभग हर दिन कही ना कहीं बम धमाका होता है. वहाँ सत्ता की असली कमान सेना के हाथ में और कठपुतली प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति आईएसआई के इशारों पर काम करते हैं.
11. हैती

अराजकता से गुजर रहा हैती 2010 के बाद अंतर्राष्ट्रीय मदद के सहारे अपने पैरों पर खड़ा हो ही रहा था कि प्रकृति ने अपना विकराल स्वरूप दिखाते हुए देश को फिर से पहले जैसी स्थिति में ला पटका. 12 जनवरी 2010 को आए विनाशक भुकम्प ने सबकुछ तबाह कर दिया. करीब 2.5 लाख नागरिक मारे गए. 10 लाख से अधिक लोग आज भी बेघर हैं. 20 लाख लोगों के पास खाने को कुछ नहीं है. ना कोई रोजगार है ना कोई अवसर.
12. आइवरी कोस्ट

आइवरी कोस्ट के उत्तरी और दक्षिण भाग के लोग आपस में टकराते रहते हैं. टकराव की मुख्य वजह देश की प्रचूर प्राकृतिक सम्पदा पर कब्जा करना है. 2007 में हुए एक समझौते के बाद तय हुआ था कि देश में चुनाव कराए जाएंगे और शांति की स्थापना की जाएगी. परंतु अभी तक मतदाता सूचि तक तैयार नहीं हुई है और देश मे अराजकता बनी हुई है.
13. केन्या

केन्या में रोबर्ट मुगाबे के अत्याचारी शासन से त्रस्त जनता को तब राहत का अहसास हुआ जब मुगाबे ने विरोधी पक्ष के नेता को अपना प्रधानमंत्री बनाने के प्रस्ताव को मंजूर किया. परंतु उसके बाद से भी देश की स्थिति में कुछ खास सुधार नहीं हुआ है. मुगाबे की अत्याचारी नीतियाँ जारी है और प्रधानमंत्री का असली लक्ष्य अपनी पार्टी को लाभ पहुँचाना लगता है. दूसरी तरफ केन्या की जनता बढती महंगाई और मुद्रा के भारी अवमूल्यन से परेशान है.
14. नाइजीरिया

यदि किसी देश के पास प्रचूर मात्रा में ईंधन हो और यदि उस देश में मजबूत लोकतंत्र ना हो या फिर सत्ता की कमान किसी मजबूत नेता के हाथों में ना हो तो उस देश का पतन तय है. ऐसा ही कुछ नाइजीरिया के साथ हुआ है. यहाँ भारी मात्रा में जैविक ईंधन उपलब्ध है परंतु भ्रष्टाचार, अराजकता और गरीबी भी उतनी ही है. नाइजीरिया की सरकार चाहे तो ईंधन के पैसों के बल पर अपने देश के नागरिकों का जीवन बेहतर बना सकती है परंतु दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा है. नाइजीरिया के लोग कुपोषण के शिकार हैं और यहाँ मलेरिया जैसे रोग से भी बड़ी संख्या में मौतें होती है.

