भारत में सबसे ज़्यादा शराब पीने की लत दक्षिणी राज्य केरल के लोगों में है. यहां शराब सबसे ज़्यादा बिकती है.
जैकब वर्गीज़ कहते हैं कि उन्होंने नौ वर्ष की उम्र से ही शराब पीना शुरु कर दिया था.
जब पिताजी के पीने के बाद गिलास में कुछ शराब बच जाती थी तो उसे वो पी लेते थे.
कोई व्यक्ति कैसे शराबी बन जाता है, ये उसकी दास्तां है.
जब वो स्कूल में थे तब सस्ती शराब पीया करते थे. उन्होंने अपना बचपन शराब के नशे में बिताया और कॉलेज की पढ़ाई भी छोड़ दी.
उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा. वो दो बार अपने हाथ की नसें काट कर आत्महत्या करने की कोशिश भी कर चुके हैं.
इतना सब कुछ होने के बाद 32 वर्ष की उम्र में वो नशामुक्ति केंद्र गए. वहां शराब पीना तो कम हुआ लेकिन इसे पूर्ण रूप से छोड़ नहीं पाए और और नशा करने के लिए सड़क पर भीख माँगने लगे.
जैकब वर्गीज़ कहते हैं, “केरल में शराब पीना एक बीमारी है. हर कोई आपको शराब पीने के लिए उकसाता है चाहे वो आपके दोस्त हों या सरकार. शराब की वजह से मेरे सगे-संबंधी, रिश्ते-नाते छूट गए, मैंने अपना सम्मान खो दिया, मेरे सारे पैसे खत्म हो गए.”
क़रीब 17 वर्षों तक शराब के नशे ने इन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से कंगाल बना दिया.
लेकिन अब जैकब वर्गीज़ ख़ुश हैं. उनकी शादी हो गई है और बच्चे भी हैं. उन्हें नौकरी भी मिल गई है. इतना सब कुछ होने में उन्हें क़रीब आठ वर्ष का समय लगा.
उनका कहना है, “मेरे कई दोस्त मेरी तरह भाग्यशाली नहीं है. शराब पीने वाले कई दोस्त मर चुके हैं और कई तो पागलखाने पहुंच चुके हैं.”
सरकार और शराब
केरल भारत का एक ऐसा राज्य बन गया है जिसने परंपरागत रूप से शराब पीने वाले राज्यों जैसे कि पंजाब और हरियाणा को भी पीछे छोड़ दिया है.
यहां शराब की प्रतिव्यक्ति खपत देश में प्रतिव्यक्ति खपत से कहीं ज़्यादा है. पूरे देश में एक साल में एक व्यक्ति के ऊपर आठ लीटर शराब की खपत होती है.
यहां सबसे ज़्यादा ‘रम’ और ‘ब्रांडी’ पी जाती है जबकि पूरे देश में ‘व्हिस्की’ सबसे ज़्यादा बिकती है.
केरल की आर्थिक स्थिति मज़बूत करने में शराब की अहम भूमिका है. यहां के वार्षिक बजट की तकरीबन 40 फ़ीसदी राशि शराब से ही आती है.
सरकारी कंपनी केरल राज्य बिवेरेज़ कॉरपोरेशन (केएसबीसी) क़रीब 377 शराब की दुकानें चलाती है. क़रीब 80 हज़ार आबादी पर एक दुकान है और ये दुकानें सातों दिन खुली रहती हैं.
यहां के लोग शराब पीने के इतने आदी हो गए हैं कि फ़ोन कॉल और एसएमएस के ज़रिए शराब की माँग करते हैं.
केएसबीसी के प्रमुख एन शंकर रेड्डी कहते हैं, ''अगर हमें कोई भी दुकान खोलने में पाँच मिनट की भी देरी हो जाती है तो ग्राहकों का एसएमएस आने लगता है कि उन्हें शराब चाहिए.”
इतना ही नहीं राज्य में क़रीब 600 निजी दुकानें हैं जहां शराब परोसी जाती है और क़रीब पाँच हज़ार से ज़्यादा दुकानें ताड़ी या कच्ची शराब बेचती हैं.
शराब और समाज
शराब के पक्षधर लोगों का कहना है कि शराब सस्ती होनी चाहिए, साथ ही ये हर जगह उपलब्ध होनी चाहिए.
इसी अभियान के साथ केरल के लोकप्रिय फ़िल्म अभिनेता एनएल बालकृष्णन भी हैं. शराब पीने वालों के हक़ में वो आवाज़ उठा रहे हैं.
एनएल बालकृष्णन 1983 से 'फ़ोरम फ़ोर बैटर स्प्रिट' नाम की संस्था चला रहे हैं.
इस संस्था की सरकार से मांग है कि शराब को सार्वजनिक वितरण प्रणाली से उपलब्ध कराया जाए और 90 साल से ऊपर के लोगों को मुफ़्त में शराब मुहैया कराई जाए.
ऐसा नहीं है कि यहां इसका विरोध नहीं हो रहा है. कई लोग शराब बेचने और पीने पर रोक लगाने की माँग भी कर रहे हैं.
इससे मुक्ति पाने के लिए कई नशामुक्ति केंद्र भी चल रहे है.