वैज्ञानिकों को कहना है कि अफ़्रीक़ा महाद्विप में एक नया महासागर पैदा हो रहा है. 2005 में अफ़्रीक़ा महाद्विप के देश ईथोपिया में एक 60 किलोमीटर लंबी दरार पड़ी थी जो लगातार बढ़ती जा रही है.
अनुसंधानकर्ताओं का मानना है कि ये दरार आख़िरकार अफ़्रीक़ी महाद्विप को दो हिस्सों में बाँट देगी. लेकिन इस प्रक्रिया को पूरा होने में एक करोड़ साल लगेगें.
भू-गर्भवैज्ञानिकों का मानना है कि ईथोपिया के दूर दराज़ अफ़ार इलाक़े में होने वाली ये घटना यक़ीन से परे है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती पर होने वाले किसी ख़ास परिवर्तन में लाखों साल लगते हैं पर अफ़्रीक़ी महाद्विप के अफ़ार क्षेत्र में पिछले पांच सालों में ही वैज्ञानिकों ने काफ़ी महत्वपूर्ण बदलाव देखें हैं.
2005 में 60 किलोमाटर लंबी दरार सिर्फ़ 10 दिनों के भीतर और आठ मीटर चौड़ी हो गई थी. धरती के केन्द्र की गर्म पिघली चट्टानें सतह की ओर बढ़ रही हैं और धरती को दो हिस्सों में विभाजित कर रहीं हैं.
अफ़्रीक़ा छोटा होगा
अफ़्रीक़ी क्षेत्र मे लंबे समय से काम करने वाले ब्रिस्टल विश्वविधालय के भूकंप वैज्ञानिक जेम्स हैमंड कहते हैं, "अफ़ार का कुछ हिस्सा समुद्र तल से नीचे है औऱ सिर्फ़ एक 20 मीटर चौड़ी ज़मीनी पट्टी इसको अलग करती है. आख़िरकार ये होगा कि समुद्र का पानी इस दरार में आ जाएगा. ये एक नए समुद्र को जन्म देगा."
जेम्स हैमंड कहते हैं " ये सब सोमालियाई प्लेट को दूर धकेलेगा जिससे दक्षिणी ईथोपिया और सोमालिया अलग हो जाएंगे. उसके बाद अफ़्रीक़ा बहुत छोटा हो जाएगा और हिंद महासागर में एक बड़े द्विप का निर्माण होगा."
अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि वो बड़े भाग्यशाली हैं जो एक नए सागर के जन्म के गवाह बने हैं. इनका ये भी मानना है कि इस तरह की घटनाओं के अध्य्यन से वे भूकंप और ज्वालामुखी जैसे प्राकृतिक आपदाओं को बेहतर तरीक़े से समझ सकेंगे.