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चीन का टैगोर प्रेम

BBC Hindi
100831140856_tagore_galleryसुबीर भौमिक  भारत के साथ भले ही सीमा विवाद हो, राजनयिक संबंध कटु हों लेकिन भारत के महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर के प्रति चीन का प्रेम बरकरार है.

भारत और बांग्लादेश में टैगोर की 150वीं सालगिरह मनाई जा रही है ऐसे में चीन की सरकार ने कोलकाता के रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में एक विशेष गैलरी के लिए आर्थिक मदद देने का फ़ैसला किया है. ये गैलरी 'रवींद्रनाथ और चीन' के नाम से जानी जाएगी.

कोलकाता में चीन के राजनयिक माओ सिवे ने बताया, "चीन के साथ महान कवि के संबंध की विशिष्टता को दर्शाने के लिए हमने एक विशेष गैलरी बनाने का निणर्य किया है. इसके लिए हम पाँच लाख से ज्यादा रुपए दान दे रहे हैं."

उन्होंने बताया कि चीन के सांस्कृतिक मंत्रालय और रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के बीच इस मामले को लेकर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए जा चुके है.

सहमति पत्र के मुताबिक यह गैलरी विश्वविद्यालय के मध्य में 180 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में स्थापित की जाएगी.

संस्कृति की झलकियाँ

माओ ने बताया कि इस गैलरी में चीनी सभ्यता के विभिन्न चरणों को दिखाया जाएगा. साथ ही इस गैलरी में चीन के प्रति रवींद्रनाथ के मन में सम्मान, वर्ष 1924 में उनकी चीन की यात्रा, शांतिनिकेतन स्थित विश्वभारती विश्वविद्यालय और चीनी साहित्य और संस्कृति की झलकियाँ होंगी.

इस गैलरी में महात्मा बुद्ध के ऊपर भी एक खंड होगा. माओ कहते हैं कि बुद्ध 'चीन और भारत के बीच एक सेतु का काम करते हैं.'

वर्ष 2011 के मई महीने में रवींद्रनाथ की 150वीं सालगिरह का समापन समारोह मनाया जाएगा. यह गैलरी उसी मौके पर खुलेगी.

माओ ने बीबीसी को बताया कि रवींद्रनाथ टैगोर चीन में काफी लोकप्रिय हैं. क़रीब 10 वर्ष पहले 24 खंडों में टैगोर की पूरी रचनावली चीन में प्रकाशित की गई.

माओ बताते हैं, "मेरी जानकारी में भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी के बाद टैगोर की सबसे ज्यादा किताबें चीनी में ही छपी हैं."

टैगोर ने चीन और भारत के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर हमेशा जोर दिया.

ग़ौरतलब है कि इस वर्ष मई में भारतीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने शंघाई के एक प्रमुख इलाक़े में टैगोर की एक प्रतिमा का अनावरण किया. 86 वर्ष पहले टैगोर ने इस शहर की यात्रा की थी.
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