Monday, May 21st

अंतिम अपडेट:04:05:04 AM IST

'अयोध्या में साथ बन जाएं मंदिर-मस्जिद’

BBC Hindi
100923145355_ayodhya_soldiersउमर फ़ारूक़  आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के फै़सले में हो रही देरी का विरोध किया है.

बोर्ड के सचिव मौलाना अब्दुल रहीम कुरैशी ने इस याचिका की वजह बताते हुए कहा की फै़सले को और टालना न्याय के हित में नहीं होगा क्योंकि पहले ही इस में काफ़ी देर हो चुकी है.

उन्होंने कहा, ''इस याचिका के ज़रिए हम अपना रुख़ स्पष्ट करना चाहते हैं कि मौजूदा हालात में अदालत का फ़ैसला ही इस समस्या का एकमात्र समाधान हो सकता है. अदालत के बाहर इस मसले का निपटारा असंभव है.''

मौलाना कुरैशी ने कहा कि 30 सितम्बर को इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक जज रिटायर होने वाले हैं और अगर उससे पहले यह फैसला नहीं सुनाया जाता है या उनका कार्यकाल नहीं बढ़ाया जाता है तो नए जज पूरी बहस दोबारा करवा सकते हैं. ऐसे में ये मामला फिर कई वर्षों तक चलता रहेगा और न्याय के विरोधी यही चाहते हैं.

'साथ बनें मंदिर-मस्जिद’

इस बीच पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि बाबरी मस्जिद बनाम राम मंदिर मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले पर मस्जिद और मंदिर का निर्माण एक दूसरे के बराबर में किया जाए तो मुस्लिम समुदाय को इस पर कोई एतराज़ नहीं है.

बोर्ड के सचिव मौलाना अब्दुल रहीम कुरैशी ने हैदराबाद में बीबीसी से बात करते हुए कहा की भारत के कई शहरों में मंदिर और मस्जिद एक दूसरे से लगकर बने हुए हैं.

मंदिर-मस्जिद एक साथ बनाए जाने के सवाल पर कुरैशी ने कहा, ''ऐसा हो सकता है और ऐसा ही होना चाहिए"

कुरैशी का मानना है कि इसे लेकर भविष्य में कोई समस्या न पैदा हो इससे आश्वस्त होने के लिए सरकार को मस्जिद और मंदिर के लिए अलग अलग रास्ते बनाने होंगे.

उन्होंने कहा की सरकार पहले ही आस-पास की काफी ज़मीन का अधिग्रहण कर चुकी है. इस ज़मीन को कई भागों में बांट कर अलग अलग रास्ते बनाए जा सकते हैं.

मौलाना कुरैशी ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले को टालने की याचिका पर सुनवाई होने जा रही है.

'संभव नहीं समझौता'

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बाबरी मस्जिद के तीन भाग थे जिसमें तीन गुम्बदों वाली एक इमारत, भीतरी अहाता और बाहरी अहता शामिल हैं.

कुरैशी ने संभावना जताई कि अदालत मस्जिद और उसके भीतरी भाग पर मुसलमानों को और ‘राम चबूतरा’ लिए बाहरी अहाते पर हिन्दुओं को अधिकार देगी.

उन्होंने कहा की इस तरह के फै़सले के बाद अगर मंदिर-मस्जिद साथ-साथ बनते हैं तो इसमें कोई हर्ज़ नहीं.

मौलाना कुरैशी ने कहा की राम चबूतरे पर हिन्दू समुदाय को इसलिए अधिकार मिल सकता क्योंकि इस स्थल पर वो 150 साल से पूजा पाठ करते रहे हैं.

इस तरह के फै़सले की उम्मीद उन सबूतों और गवाहों पर आधारित है जो अदालत के सामने पेश की गई थीं.

मौलाना कुरैशी ने कहा की अदालत के बाहर अब कोई समझौता इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि विश्व हिन्दू परिषद, आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी जैसे संगठन अपनी मांग से एक इंच भी हटने के लिए तैयार नहीं हैं.
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