Monday, May 21st

अंतिम अपडेट:04:05:04 AM IST

प्रतिभाओं और उपलब्धियों का साल

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खेल की दुनिया का एक ऐसा साल जिसकी शुरुआत लाहौर की उस सनसनीखेज घटना से हुई, जिसने खेल जगत को थर्रा दिया.

लाहौर में श्रीलंका की टीम पर हुए हमलों के दृश्य महीनों तक टीवी चैनलों पर छाए रहे लेकिन खेल जगत के दिलो-दिमाग़ यह लंबे समय तक रहेगा.

इस हमले का नुक़सान ये हुआ कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों से महरूम हो गया. एशियाई महाद्वीप क्रिकेट के जुनून को लेकर जाना जाता है और उसमें पाकिस्तान भी है.

लेकिन पाकिस्तान में हुई इस घटना ने वहाँ के क्रिकेट प्रेमी लोगों को ऐसी गाज गिराई कि वे अंतरराष्ट्रीय मैचों से वंचित हो गए. वे फिर कब अंतरराष्ट्रीय मैच देख पाएँगे, कहना मुश्किल है.

साल की शुरुआत में हुई ये घटना सुर्ख़ियों में रही, तो साल के अंत में महान गोल्फ़ खिलाड़ी टाइगर वुड्स की निजी ज़िंदगी और इसके कारण उनका पेशेवर गोल्फ़ से अनिश्चितकालीन दूर रहने के ऐलान ने भी ख़ूब सुर्ख़ियाँ बटोरी.

वुड्स प्रकरण

वुड्स उस समय विवाद में आए जब उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हुई और फिर मीडिया में उनके विवाहेत्तर संबंधों की ख़बरें आने लगीं. मीडिया टाइगर वुड्समय हो गया और फिर वुड्स ने भी यह माना कि उन्होंने अपनी पत्नी से बेवफ़ाई की है और वे इस नुक़सान की भरपाई करना चाहते हैं.

वुड्स की निजी ज़िंदगी कौन सा करवट लेगी, पता नहीं. लेकिन इतना तो ज़रूर है कि गोल्फ़ की दुनिया वुड्स के बिना फींकी रहेगी और प्रशंसक बेहतरीन गोल्फ़ का नज़ारा नहीं देख पाएँगे.

विवाद खेल की दुनिया का स्वाभाविक हिस्सा बनते जा रहे हैं. ख़ासकर ऐसे महौल में जब जीतने का जज़्बा इतना है कि वो कभी-कभी खेल भावना की परवाह नहीं करता.

आंद्रे अगासी ने अनजाने में नशीली दवा लेने की बात मानी तो दक्षिणी अफ़्रीका की धावक कैस्टर सेमेन्या के लिंग परीक्षण को लेकर विवाद गहराया.

डोपिंग में भारतीय क्रिकेटरों के अड़ियल रवैए ने सुर्ख़ियाँ बटोरी तो साल के अंत में वेस्टइंडीज़ के खिलाड़ी सुलेमान बेन की मैदान पर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के साथ झड़प ने भी क्रिकेट को दाग़दार किया.

लेकिन इन सब विवादों के बीच भी कुछ खिलाड़ियों ने अपने जज़्बे और प्रदर्शन से खेल की दुनिया को चकाचौंध कर दिया.

बोल्ट का धमाका

उसैन बोल्ट जब बर्लिन में दौड़े तो उन्हें शायद याद भी नहीं था कि उन्होंने बीज़िंग में कितनी तेज़ी से दौड़ लगाई. बोल्ट दौड़े तो रिकॉर्ड भी टूटे और इस खिलाड़ी ने वर्षों से दाग़दार एथलेटिक्स की दुनिया को बताया कि यहाँ सब कुछ बुरा नहीं.

रोजर फ़ेडरर ने टेनिस की दुनिया में अपना झंडा गाड़ा और 15 ग्रैंड स्लैम जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने. फ़ेडरर की जीत से ज़्यादा अहम रही बुरे दौर से वापस निकलने की उनकी जद्दोजहद, जिसमें वे विजेता बनकर सामने आए.

फ़्रेंच ओपन न जीत पाने की उनकी कसक भी वर्ष 2009 में ख़त्म हुई, तो महिलाओं के वर्ग में वापसी करते हुए बेल्जियम की किम क्लाइस्टर्स ने भी इतिहास रचा. माँ बनने के बाद उन्होंने यूएस ओपन का ख़िताब अपने नाम किया.

नडाल की परेशानी सामने आई, लेकिन इस खिलाड़ी ने अभी हार नहीं मानी है. रैंकिंग में अभी वे दूसरे नंबर पर हैं और आने वाले वर्ष में अगर फ़ेडरर के ताज को सबसे बड़ी चुनौती देने वाला कोई है, तो वे नडाल ही हैं.

क्रिकेट की दुनिया में भारत का टेस्ट की नंबर वन टीम बनना बड़ी ख़बर रही. जब से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने रैंकिंग शुरू की है, भारत की टीम नंबर वन तक पहुँचने वाली सिर्फ़ तीसरी टीम है.

शानदार सचिन

भारत ने इस साल क्रिकेट की दुनिया में अपने को और मज़बूत बनाने की दिशा में क़दम बढ़ाया. लेकिन इस साल टीम चैम्पियंस ट्रॉफ़ी और ट्वेन्टी-20 विश्व कप में बुरी तरह हारी.

सचिन तेंदुलकर ने धमाकेदार करियर को 20वें साल में पहुँचाया तो गौतम गंभीर ने भारतीय बल्लेबाज़ के प्रमुख स्तंभ के रूप में अपने को स्थापित किया. सहवाग भी फ़ॉर्म में आए तो धोनी भी अच्छा प्रदर्शन करते रहे.

ऑस्ट्रेलिया की टीम लगातार दूसरी बार इंग्लैंड की धरती पर ऐशेज़ में हारी तो पाकिस्तान ने ट्वेन्टी-20 विश्व कप जीतकर अपने प्रशंसकों को अच्छा तोहफ़ा दिया.

वर्ष 2009 में खेल की दुनिया में बोल्ट और फ़ेडरर जैसे खिलाड़ियों का दबदबा रहा. उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले वर्ष में कई और बोल्ट, फ़ेडरर और तेंदुलकर मिलेंगे.
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