बीबीसी ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वाइरोलोजी के निदेशक डॉ एसी मिश्रा से पूछा कि कांगो वायरस क्या है, इसके लक्षण कैसे होते हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है?
बीबीसी ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वाइरोलोजी के निदेशक डॉ एसी मिश्रा से पूछा कि कांगो वायरस क्या है, इसके लक्षण कैसे होते हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है?कुछ जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लूएचओ ने भी दी.
क्या इस संक्रमण के लक्षण भारत में पहली बार देखे गए हैं?
हाँ, भारत में ये बीमारी इससे पहले रिकॉर्ड नहीं की गई थी. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ये संक्रमण अफ़्रीका, यूरोप और एशिया के कई देशों में पाया जाता है.
वर्ष 2001 के दौरान कोसोवो, अल्बानिया, ईरान, पाकिस्तान और दक्षिण अफ़्रीक़ा में इसके काफ़ी मामले पाए गए थे.
इस संक्रमण के लक्षण सबसे पहले वर्ष 1944 में क्रिमिया में सामने आए थे. 1969 में ये पाया गया कि कांगों में भी इसी तरह का संक्रमण फैला था और इसीलिए इस वायरस को क्रिमियन कांगो वायरस के नाम से जाना जाता है.
हालांकि आमतौर पर जानवर ही इसका शिकार होते हैं लेकिन यह संक्रमण मनुष्यों में भी फैल जाता है.
इस बीमारी की चपेट में आनेवाले व्यक्तियों की मौत की आशंका बहुत ज़्यादा होती है. और एक बार संक्रमित हो जाने पर इसे पूरी तरह से शरीर में फैलने में तीन से नौ दिन लग सकते हैं.
ये किस तरह से फैलता है?
कुछ संदिग्ध मामलों की जाँच जारी है. जानवरों में ये बीमारी टिक्स या पिस्सू से फैलती है.
पर ये बीमारी बहुत ही ख़तरनाक है क्योंकि इस तरह के संक्रमण के 30 से 80 प्रतिशत मामलों में मौत हो जाती है.
मौत शरीर से ख़ून का तेज़ रिसाव और शरीर के विभिन्न अंगों का एक साथ फ़ेल होने की वजह से होती है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ इससे संक्रमित होने पर बुख़ार के एहसास के साथ शरीर की मांशपेशियों में दर्द, चक्कर आना और सर में दर्द, आंखों में जलन और रोशनी से डर जैसे लक्षण पाए जाते हैं.
कुछ लोगों को पीठ में दर्द और मितली होती है और गला बैठ जाता है.
डॉ मिश्रा का कहना है कि अहमदाबाद के आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को बुखार होने पर डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए.
इस पर क़ाबू पाने के लिए कौन से क़दम उठाए जा रहे हैं?
संक्रमण के लक्षण पाए जाने के बाद अस्पतालों को सलाह दी गई है कि वो इसे फैलने से रोकने के सभी उपाय करें.
पीड़ित व्यक्ति के रिश्तेदारों और उनका इलाज करने वाले चिकित्सकों से कहा गया है कि वो बीमार के शरीर से निकलने वाले द्रव्यों से ख़ुद को सुरक्षित रखें.
लोगों से कहा गया है कि वो ख़ुद में या किसी की जान पहचान वाले में संक्रमण के लक्षण पाने पर फ़ौरन अस्पताल से संपर्क करें.
गुजरात सरकार ने अहमदाबाद के अस्पतालों और पास के गांवों में ऐसे मरीज़ों की पहचान के लिए स्क्रीनिंग शुरू कर दी है.