अमरीका के पूर्व रक्षा मंत्री डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड का कहना है कि अमरीका पर ग्यारह सितंबर 2001 को हुए हमलों के 15 दिनों के बाद ही उनसे कहा गया था कि वह पेंटागन की इराक़ के लिए युद्ध नीति पर पुनर्विचार करें.
अमरीका के पूर्व रक्षा मंत्री डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड का कहना है कि अमरीका पर ग्यारह सितंबर 2001 को हुए हमलों के 15 दिनों के बाद ही उनसे कहा गया था कि वह पेंटागन की इराक़ के लिए युद्ध नीति पर पुनर्विचार करें.डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड 78 वर्ष के हैं और उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी है जिसमें इन बातों का ज़िक्र है.
इस आत्मकथा से लीक हुए अंशों को वॉशिगंटन पोस्ट और न्यूयॉर्क टाइम्स ने छापा है.
बीबीसी के वॉशिगंटन संवाददाता स्टीव किंग्सटन का कहना है कि आत्मकथा से विचार को बल मिलता है कि तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पहले से ही इराक़ पर नज़रें गड़ाए बैठे थे जबकि उनका प्रशासन अल क़ायदा के ख़िलाफ़ जंग की तैयारी कर रहा था.
न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे एक अंश के अनुसार रम्सफ़ेल्ड ने बताया है कि किस तरह 9/11 के 15 दिन बाद उन्हें अकेले अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ओवल ऑफ़िस में बुलाया गया.
रम्सफ़ेल्ड के हवाले से बताया गया है, "मुझे इराक़ युद्ध के बारे में तत्कालीन योजनाओं पर पुनर्विचार करने को कहा गया और बुश का ज़ोर इस बात पर था कि जिन विकल्पों पर विचार हो, वे रचनात्मक यानी नए तरीके के हों."
उधर पूर्व राष्ट्रपति बुश ने अपनी किताब में कहा था कि उन्होंने ऐसा अनुरोध छह हफ़्ते बाद किया था.
लेकिन डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड को इराक़ युद्ध के बारे में कोई अफ़सोस नहीं है. उनका तर्क है कि यदि सद्दाम हुसैन सत्ता में बने रहते तो मध्य पूर्व में आज स्थिति और ख़तरनाक होती.
उनका ये भी कहना है कि वे और संख्या में सैनिक भेज सकते थे.
रम्सफ़ेल्ड का कहना है कि उन्हें सबसे ज़्यादा अफ़सोस इस बात का है कि उन्होंने अबू ग़रैब जेल कांड के सार्वजनिक होने के बाद तत्काल पद क्यों नहीं छोड़ दिया. हालाँकि वे कहते हैं कि उनके जॉर्ज बुश ने दो बार उनके इस्तीफ़े की पेशकश को नामंज़ूर कर दिया था.