इबादुल हक़ रेड लाइट एरिया के बारे में कहा जाता है कि उसकी रातें जागती हैं और दिन सोते हैं. अगर इस बात को सही मान लिया जाए तो लाहौर के ऐतिहासिक हीरामंडी बाज़ार पर ये बात पूरी तरह खरी नहीं उतरती.
इबादुल हक़ रेड लाइट एरिया के बारे में कहा जाता है कि उसकी रातें जागती हैं और दिन सोते हैं. अगर इस बात को सही मान लिया जाए तो लाहौर के ऐतिहासिक हीरामंडी बाज़ार पर ये बात पूरी तरह खरी नहीं उतरती.पाकिस्तान में बढ़ते हुए आतंकवाद ने जहाँ आम जीवन को प्रभावित किया वहीं लाहौर का ऐतिहासिक रेड लाइट एरिया इससे बच नहीं सका है.
लाहौर के केंद्र में स्थित रेड लाइट एरिया हीरामंडी पर इन दिनों प्रतिबंध है और चरमपंथी गतिविधियों के कारण वे सभी कोठे बंद हो गए हैं जहाँ रात को नृत्य और संगीत की महफ़िलें हुआ करती थीं.
पाकिस्तान का ये एक मात्र बाज़ारे हुस्न था जहाँ पचास के दशक में क़ानूनी तौर पर नाच और गाने की अनुमित दी गई थी और रोज़ाना तीन घंटे के लिए महफ़िलें होती थीं.
क़ानूनी हैसियत
इस रेड लाइट एरिया में लगभग 300 कमरे थे जहाँ रात दस बजे से एक बजे तक नाच और संगीत को देखने की इजाज़त थी जिसको बाद में दो घंटे के लिए कर दिया गया था.
हीरामंडी इलाक़े के निवासी नदीम अली का कहना है कि आतंकवाद के ख़तरे से पुलिस ने बाज़ार में नाच और गाना बंद करवा दिया है और उससे कई लोग बेरोज़गार हो गए हैं.
उन्होंने कहा कि बाज़ारे हुस्न तो पुलिस ने बंद करवा दिया लेकिन शहर के कई इलाक़ों में महफ़िलें जारी हैं.
उनके मुताबिक दिन घरों में गाने और संगीत की महफ़िलें होती थी अब उन घरों पर ताले लगे हुए हैं और उन घरों को अब व्यापारी ख़रीद रहे हैं.
'आतंकवाद बड़ा कारण'
लाहौर पुलिस का कहना है कि इस बाज़ार में नाच और गाने की महफ़िलों पर प्रतिबंध आतंकवाद के कारण है.
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी डॉक्टर शहज़ाद ने बीबीसी को बताया कि एक साल पहले इसी इलाक़े में धमाके हुए थे जिसके बाद नृत्य करने वाले लोग यहाँ से चले गए और पुरानी संस्कृति ख़त्म हो गई.
शहर के कुछ लोगों का मानना है कि हीरामंडी बंद होने से वेश्यावृत्ति में बढ़ोतरी हुई है और यौनकर्मियों की संख्या पहले से काफ़ी बढ़ गई है.
पुलिस के अनुसार शहर में तीन सौ से अधिक ऐसे घर हैं जहाँ वैश्यावृत्ति हो रही है और उसमें अधिकतर होटल हैं.