अमरीकी विदेश मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने तालेबान को राजनीतिक मुख्य धारा से जोड़ने के संकेत देते हुए कहा है कि तालेबान अफ़ग़ानिस्तान के राजनीतिक तानेबाने का हिस्सा हैं.उन्होंने कहा है कि यह तालेबान पर निर्भर करता है कि क्या वे लोगों को मारना बंद करके चुनावी राजनीति में हिस्सा लेना चाहते हैं.
अपनी दो दिनों की पाकिस्तान यात्रा के अंतिम दिन उन्होंने पत्रकारों से कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में हथियार डालने वाले तालेबान को पैसा और नौकरी देने की योजना को अमरीका का समर्थन है.
अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने लाखों डॉलर की एक योजना बनाई है जिसके अनुसार विद्रोह छोड़ने वाले तालेबान लड़ाकों को पैसा और रोजग़ार दिया जाएगा और सुरक्षा की गारंटी दी जाएगी.
बीबीसी से हुई विशेष बातचीत में उन्होंने दावा किया था कि उनकी इस योजना को अमरीका और ब्रिटेन का समर्थन है.
रॉबर्ट गेट्स ने उनके इस दावे की पुष्टि की है कि यह योजना दानदाता देशों के पैसों से ही चलनी है.
उल्लेखनीय है कि अमरीका काफ़ी समय से 'अच्छे तालेबान' और 'बुरे तालेबान' की बात कहता रहा है, हालांकि इसे लेकर सभी देश सहमत नहीं हैं. ख़ासकर भारत इससे सहमत नहीं है.
अमरीका को उम्मीद
समाचार एजेंसियों के अनुसार रॉबर्ट गेट्स ने पत्रकारों से कहा है कि अमरीका को उम्मीद है कि निचले स्तर के कई तालेबान लड़ाके अफ़ग़ानिस्तान सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर सकते हैं और वहाँ की राजनीतिक गतिविधियों में भागीदार बन सकते हैं.
तालेबान को अफ़ग़ानिस्तान के राजनीतिक तानेबाने का हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा, "सवाल यह है कि क्या तालेबान अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य के लिए राजनीतिक तानेबाने में कोई वैध भूमिका निभाने को तैयार हैं, जिसका मतलब है कि वे अधिकारियों की हत्या करना बंद कर दें और परिवारों को मारना छोड़ दें."
अमरीकी सेना और अधिकारी पहले ही कह चुके हैं कि अमरीका और दूसरी विदेशी फ़ौजें जो लड़ाई लड़ रही हैं, अकेले उसके दम पर अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान को ख़त्म करना पूरी तरह से संभव नहीं है.
रॉबर्ट गेट्स के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि अमरीका तालेबान के लिए अफ़ग़ानिस्तान की लोकतांत्रिक राजनीति में आने का रास्ता बनाने के प्रयास शुरु कर दिए हैं.
अमरीका की यह पहल उस समय सामने आई है जब आतंक के ख़िलाफ़ युद्ध में उसके अहम साझेदार पाकिस्तान के साथ अमरीका के रिश्ते तल्ख़ हुए हैं और पाकिस्तान की सेना ने साफ़ कह दिया है कि वह अगले एक साल तक चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कोई नई कार्रवाई शुरु करने की स्थिति में नहीं है.
हालांकि अमरीका लगातार कहता रहा है कि अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे पाकिस्तान के क़बाली इलाक़े में चरमपंथियों से निपटने के लिए और प्रयास किए जाने की ज़रुरत है.
इस बीच रॉबर्ट गेट्स ने पाकिस्तान की पुरानी माँग को पूरा करते हुए उसे चालक रहित विमान यानी ड्रोन देना स्वीकार कर लिया है.
अमरीका पाकिस्तान को जो ड्रोन देगा उसमें निगरानी रखने वाले सारे उपकरण लगे होंगे लेकिन वे मिसाइल से लैस नहीं होंगे.
करज़ई की योजना
इससे पहले बीबीसी के वैश्विक मामलों के संपादक जॉन सिंपसन से हुई विशेष बातचीत में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा था कि विद्रोह त्याग देने वाले तालेबान लड़ाकों को नौकरियाँ और पैसा देने की उनकी योजना को ब्रिटेन और अमरीका का समर्थन हासिल है.
उन्होंने कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान में किसी भी कीमत पर शांति कायम करनी ज़रूरी है.
राष्ट्रपति करज़ई ने कहा है कि जो तालेबान लड़ाके अल-क़ायदा या फिर किसी अन्य ‘आतंकवादी’ संगठन के सदस्य हैं, उन्हें इस योजना के तहत कुछ नहीं दिया जाएगा.
राष्ट्रपति करज़ई का कहना था कि जो लड़ाके अफ़ग़ानिस्तान के संविधान को स्वीकार करते हैं और विचारधार के आधार पर सरकार का विरोध नहीं करते, वे मुख्यधारा में लौट सकते हैं.
उन्होंने कहा हैकि 28 जनवरी से लंदन में अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर होने वाले सम्मेलन में ब्रिटेन और अमरीका उनकी योजना का समर्थन करेंगे. उन्होंने कहा है कि जापान भी इस योजना के लिए पैसे देने को तैयार है.