मुंबई आतंकी हमले की अंतिम जिरह मंगलवार से शुरू हो गई. अंतिम जिरह शुरू करते हुए अभियोजन पक्ष के वकील उज्ज्वल निकम ने मुंबई पर 26 नवंबर 2008 के आतंकी हमले को राज्य प्रायोजित आतंकवाद का नायाब नमूना बताया.
उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि यह हमला पाकिस्तानी सेना की मदद से किया गया था. देश और दुनिया के लिए बहुप्रतीक्षित इस मुकदमे की गंभीरता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि अभियोजन पक्ष द्वारा अंतिम जिरह की शुरुआत के दिन राज्य के गृह मंत्री आर.आर. पाटिल और गृह राज्य मंत्री रमेश बागवे आज स्वयं अदालत में उपस्थित थे. मुंबई आतंकी हमले के दौरान मुख्यतया छह ठिकानों को निशाना बनाया गया था, जिसमें 166 लोग मारे गए थे.निकम द्वारा आज पाकिस्तान को निशाना बनाते हुए कहे गए शब्दों का महत्व तब और बढ़ जाता है जब पाकिस्तान इस हमले में अपनी सीधी भूमिका से इनकार कर चुका है और लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक व जमात-उद-दावा के मुखिया हाफिज सईद की गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहा है. निकम ने मुकदमे की सुनवाई कर रहे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एमएल तहलियानी को बताया कि इस हमले की साजिश पाकिस्तानी भूमि पर रची गई और जुटाए गए तथ्यों से साबित होता है कि यह एक राज्य प्रायोजित हमला था. अपने कथन को मजबूती देते हुए निकम ने कहा कि हमला करने आए 10 आतंकियों को बाकायदा मिलिट्री ट्रेनिंग दी गई थी और वे खतरनाक हथियारों और विस्फोटकों का उपयोग करने में माहिर थे. निकम द्वारा दी जा रही दलीलों को इस हमले का मुख्य आरोपी पाकिस्तानी नागरिक अजमल अमीर इमान उर्फ अजमल कसाब बड़े गौर से सुनता दिखाई दिया. उसके साथ इस मामले के दो अन्य आरोपी फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद भी मौजूद थे.

