भारतीय प्रशासनिक सेवा में अगले साल से अभ्यर्थियों को नए पैटेर्न का सामना करना होगा. केन्द्र सरकार ने प्रारम्भिक परीक्षा के स्थान पर सिविल सर्विस एप्टीट्यूड टेस्ट के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.
अगले सत्र से अभ्यर्थियों को सिविल सर्विस एप्टीट्यूड टेस्ट के अंतर्गत ऑब्जेक्टिव टाइप परीक्षा देनी होगी जिसमें अभ्यर्थियों के प्रशासनिक सेवाओं के प्रति दृष्टिकोण के साथ-साथ निर्णय क्षमता में नैतिक और आयामों का भी पता लगाया जा सकेगा. भारतीय प्रशासनिक सेवा में इस बदलाव की पुष्टि करते हुए राज्य मंत्री पृथ्वीराज च्वाण ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब पर इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्तमान में जारी प्री परीक्षा के स्थान पर सी.एस.ए.टी. का अनुमति दे दी है. 2011 से भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में प्रारम्भिक परीक्षा के स्थान पर सी.एस.ए.टी. का आयोजन किया जाएगा. उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव संघ लोक सेवा आयोग (यू.पी.एस.सी.) ने पिछले वर्ष प्रधानमंत्री कार्यालय भिजवाया था.
इस पैटर्न में दोनों प्रश्न पत्र को समान महत्तव देते हुए वर्तमान में लिए जाने सामान्य अध्ययन के स्थान पर लिया जाएगा और दूसरा पेपर विकल्प प्रश्नपत्र के रूप में वर्तमान प्रणाली के अनुसार ही लिया जाएगा. फिलहाल यह परिवर्तन भारतीय प्रशासनिक सेवाओं की प्रारम्भिक सेवाओं में ही किया जा रहा है. मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार प्रणाली में अभी कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.

