आंध्र प्रदेश विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें केंद्र सरकार से गुहार लगाई गई है कि वो ऐसा क़ानून बनाए जिसके तहत हैदराबाद के निचले स्तर की नौकरियों पर केवल स्थानीय और तेलंगाना क्षेत्र के कुछ ज़िलों के लोगों को ही भर्ती किया जा सके.
इस प्रस्ताव के पारित होने के साथ ही यह मुद्दा एक बार फिर एक गरमागरम विवाद का विषय बन गया है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय का कहना है कि हैदराबाद एक फ़्री ज़ोन है यानी उसकी नौकरियों का सबका हक़ है.
राज्य सरकार का कहना है कि ज़ोनल व्यवस्था के अंतर्गत हैदराबाद और पांच अन्य ज़िले ज़ोन छह में आते हैं और वहां की सरकारी नौकरियों पर इसी ज़ोन के रहने वालों को भर्ती किया जा सकता है. गुरुवार को राज्य विधानसभा में शोर शराबे के बीच प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित किया गया. मुख्यमंत्री के रोसैया ने प्रस्ताव में केंद्र सरकार से मांग की है कि 1975 के राष्ट्रपति के आदेश में संशोधन के लिए ज़रूरी क़दम उठाए, ताकि हैदराबाद की नौकरियों पर स्थानीय लोगों का अधिकार वापस आ सके. सरकार के अनुसार 1975 से पहले हैदराबाद की नौकरियों पर वहां के स्थानीय लोगों को ही भर्ती किया जाता था.

