आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से गुरुवार शाम 4.27 बजे भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी-डी3) का प्रक्षेपण नाकाम हो गया है.
लॉंच के 500 सेकंड के बाद जीएसएलवी से संकेत मिलने बंद हो गए. इसरो के अध्यक्ष श्री राधाकृष्णन ने कहा कि स्वदेशी क्रायोजनिक इंजिन ने उम्मीद के अनुसार काम नहीं किया. जीएसएलवी डी-3 के दो बर्नियर इंजन चालू नहीं सके, जिसके चलते इसके प्रक्षेपण में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी. उन्होने कहा कि इस उडान की जाँच की जाएगी और अगली उडान सफल होगी.
जीएसएलवी को एक बार फिर एक वर्ष के भीतर लॉंच किया जाएगा.
इस रॉकेट में स्वदेशी क्रायोजनिक इंजन लगा हुआ था. यह रॉकेट अत्याधुनिक संचार उपग्रह जीसैट-4 को कक्षा में स्थापित करने वाला था. इस रॉकेट का वजन 416 टन है जिसमें 200 टन तरल प्रणोदक भरा हुआ है.
क्रायोजनिक प्रौद्योगिकी अमरीका, रूस, चीन, जापान, चीन और फ्रांस के पास पहले से ही है. अगर आज की उडान सफल रहती तो भारत भी इस सूचि में शामिल हो जाता.
भारत स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजिन कार्यक्रम पर पिछले 15 वर्षों से काम कर रहा था. उल्लेखनीय है कि अमरीका नहीं चाहता था कि भारत के पास यह तकनीक आए. इसके लिए अमरीका ने रूस पर भी दबाव बनाया था.
भारत अब तक रूस से मिले क्रायोजेनिक इंजिन इस्तेमाल करता आया था. जीएसएलवी की पिछली पाँच उडानों में रूसी क्रायोजेनिक इंजिन लगे थे.

