सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को दिए गए दूरगामी परिणाम वाले अपने ऐतिहासिक फैसले में नारको एनालिसिस, ब्रेन मैपिंग या पोलीग्राफ टेस्ट जैसी जांचों को अवैध करार दिया है. अदालत का कहना है कि किसी व्यक्ति की इस तरह की गयी जांच उसे संविधान में प्राप्त स्वदोषारोपण से छूट व निजी स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हैं. हालांकि अदालत ने सहमति और स्वेच्छा से कराई गई जांचों को छूट दी है. यह फैसला मुख्य न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान दिया.
ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 25 जनवरी 2008 को कुछ याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. गॉडमदर के नाम से कुख्यात गुजरात की संतोकबेन जडेजा, तमिल फिल्म निर्माता के. वेंकटेश्वर राव, जाली स्टाम्प पेपर घोटाले के आरोपी दिलीप कामथ और महाराष्ट्र के निर्दलीय विधायक अनिल गोते की इन याचिकाओं के जरिए ब्रेन मैपिंग और नार्को टेस्ट जैसी जांच तकनीकों को चुनौती दी गई थी.

