48 वर्ष बाद भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए सिपाही करम चंद के पार्थिव शरीर का उनके पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया.
25 अक्टूबर, 1962 को भारत-चीन युद्ध के दौरान चीनी सैनिकों ने अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में वालोंग चौकी पर हमला कर दिया था. तब भारतीय सैनिक 22 दिनों तक अल्प संसाधनों के बावजूद उनसे लड़ते रहे. इस लड़ाई में कई सैनिक लापता हो गए थे. सिपाही करम चंद भी उनमें से एक थे.
परिजन हमेशा यही सोचते रहे थे कि चंद को युद्ध अपराधी बनाया गया है. मगर एक जुलाई को उनका शव मलबे के नीचे दबा मिला. सीमा सड़क संगठन की एक टुकड़ी को वालोंग इलाके में उनके पहचान टैग, कागजात और हथियार सही सलामत मिले थे.

