सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसी महिला से जुड़ी याचिका मंज़ूर की है जिनके बारे में कहा गया है कि वे 1973 के बाद से ब्रेन डेड हैं यानी शरीर के संचालन में दिमाग़ किसी प्रकार का सहयोग नहीं कर रहा. याचिका में उनके लिए इच्छामृत्यु की अपील की गई है.
27 नवंबर 1973 में अरुणा नाम की इस नर्स के साथ एक अस्पताल सफ़ाई कर्मचारी ने दुश्कर्म किया था. उसके बाद उन्हें पक्षाघात हो गया और वे 36 साल से ब्रेन डेड हैं. याचिका एक पत्रकार ने दायर की है जिन्होंने अरुणा पर एक क़िताब लिखी है. अब कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि क्या इस याचिका का मतलब इच्छामृत्यु तो नहीं है. भारत में इच्छामृत्यु ग़ैर क़ानूनी है और इस संदर्भ में इस मामले को दिशा-निर्देशक मामला माना जा रहा है.

