2-1 से लिए गए निर्णय के अनुसार विवादित भुमि के तीन हिस्से होंगे- रामलला जहां विराजमान हैं वो हिंदुओं को, बाहर का परिसर- मुस्लिम गुटों को और तीसरा क्षेत्र निर्मोही अखाड़ा को दिया गया है.
रामलला को वर्तमान स्थिति से हटाया नहीं जाएगा. तथा परिसर में यथास्थिति तीन महीने तक यथावत रखी जाएगी.
तीनों न्यायाधिशों में न्यायाधिश खान का मत है कि दोनों पक्षों को एक तिहाई एक तिहाई भूमि मिले और इसमें ध्यान रखा जाए कि जहां रामलला हैं वो हिंदुओं को मिले.
वहीं न्यायाधिश अग्रवाल का निर्णय है कि रामलला जहां विराजमान थे वो हिंदुओं को दिया जाए, जहां सीता की रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अख़ाड़ा और जहां मुस्लिम नमाज पढ़ते थे वो मुस्लिमों को दे दिया जाय.
न्यायाधिश धर्मवीर शर्मा की राय में पूरा परिसर हिंदुओं को दिया जाए.
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार ढांचे के नीचे एक बड़ा हिंदू धार्मिक ढांचा था. बाबर ने ढांचा इस्लाम के उसूलों के विरूद्ध बनवाया था. इसलिए इसे मस्जिद नहीं माना जा सकता.
उक्त निर्णय से निराश बाबरी कमिटी सर्वोच्च न्यायालय में जाएगा. दुसरी तरफ हिंदू महासभा के वकील एचएस जैन ने कहा है कि हम सर्वोच्च न्यायालय में जाएंगे क्योंकि हमें तीन भागों में भूमि बाँटना सही नहीं लगा है. सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने भी कहा है कि हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. अपील के लिए तीन महिने का समय दिया गया है.

