स्टीव जॉब्स, सिलिकन वैली के महारथी. कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर व इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद निर्माता कम्पनी एप्पल के इस 56 वर्षिय संस्थापक का कैलिफोर्निया में बुधवार को निधन हो गया. स्टीव कैंसर से पीडित थे, उनके निधन के साथ एप्पल ने ही नहीं विश्व ने एक दूरदर्शी व रचनात्मक प्रतिभा को खो दिया है. उनमें अलग सोचने और उसे सच में बदल देने की अद्भूत क्षमता थी.
आईपॉड और आईफोन जैसे आश्चर्यजनक उपकरण जिनका जादू सर चढ़ कर बोला, स्टीव की ही देन है. स्टीव ने स्टीफन वॉजनेक के साथ 1976 में एप्पल कम्प्यूटर की स्थापना की थी. कम्पनी के लिए पूँजी एकत्र करने के लिए उन्होने अपनी कार बेच दी. 1976 में उनका पहला कम्प्यूटर बाजार में आया जो 666.66 डॉलर का बिका. फिर एप्पल जो 1980 में सामने आया और देखते ही देखते दो वर्षों में इसकी बिक्री ने एक अरब डॉलर का आँकड़ा छू लिया.
1985 में स्टीव ने एप्पल से त्यागपत्र दे दिया. 1997 में उनकी सलाहकार के रूप में एप्पल में वापसी हुई. उनकी वापसी का असर जल्द ही दिखा, 1998 में आकर्षक आईमैक जारी हुआ जिसने एप्पल का भाग्य ही बदल दिया.
इसके बाद बारी आई जादू जैसे उपकरण आईपॉड की, जो एक क्रांति की तरह था. इसके बाद 1997 में जारी हुआ एप्पल का स्मार्ट फोन आई-फोन, जिसे खरीदने के लिए दुकानों में कतारें लगी.
स्टीव की सोच का अगला चमत्कार था, टच स्क्रीन वाले आईपैड टैबलेट कंप्यूटर जिसने तो मानो कंप्य़ूटर की दुनिया ही बदल दी. साथ ही एप्पल अपने प्रतिस्पर्धियों से बहुत आगे निकल गई.
भारत से सम्बन्ध
यूवा स्टीव भारत आना चाहते थे और इसके लिए राशि जुटाने के लिए उन्होंने कॉलेज छोड़ कर एक वीडियो खेल बनाने वाली कम्पनी ‘अटारी’ के साथ काम किया. जब स्टीव भारत से वापस लौटे तो वे सर मुंडवा चुके थे तथा भारतीय भेष-भुषा धारण किये हुए थे. उन्होने बौद्ध-धर्म को अपनाया था. वे आजीवन शाकाहारी रहे.

