श्रीनगर के हब्बा कादल इलाके में स्थित शिव मंदिर की घंटी फिर से बज उठी है. 20 वर्ष के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब श्रीनगर में किसी मंदिर की घंटी बजी हो.
आज श्रीनगर के इस इलाके में गिने चुने कश्मीरी पंडित रहते हैं, लेकिन 20 वर्ष पहले यह मौहल्ला हिन्दूओं से भरा हुआ था. लेकिन 1990 की शुरूआत के साथ ही घाटी के हिन्दूओं को भगाए जाने अथवा मारे जाने की शुरूआत हो गई थी.
2 दशक के समय के दौरान शीतल भैरव मंदिर में कई बार तोड़ फोड़ की गई और दो बार आग भी लगाई गई. लेकिन अब कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति ने इस मंदिर का पुन: जिर्णोद्धार किया है. इस समिति के प्रमुख संजय टिक्कू के अनुसार इस मंदिर का काफी सामाजिक और धार्मिक महत्व है.
उल्लेखनीय बात यह है कि 2 दशक तक इस मंदिर की रखवाली एक मुस्लिम लकड़हारा कर रहा था, जिसे शिकायत है कि उसके अपने लोग और मौहल्लेवाले उसे हिन्दू पूजारी कहकर चिढाते हैं और मजाक बनाते हैं. उसे पिछले कई वर्षों से अपनी नौकरी के पैसे भी नहीं मिले हैं.
केपीएसएस के अनुसार उन्होनें पिछले 10 वर्षों मे कश्मीर के 23 मंदिरो को फिर से शुरू करवाया है और इस वर्ष 60 और मंदिर फिर से खोले जाएंगे.
- 90 के दशक से पहले कश्मीर घाटी में 583 मंदिर थे
- इनमें से 532 मंदिर तोड़ दिए गए
- 52 मंदिरों का कोई अता पता नहीं
- कभी कश्मीर घाटी में लाखों की संख्या में हिन्दू पंडित रहते थे
- आज गिने चुने हिन्दू ही घाटी में बचे हैं

