इस समय देश में बाघों की घटती संख्या के प्रति जनचेतना का कार्यक्रम चलाया जा रहा है. भारत में मात्र 1400 के करीब बाघ बचे हैं, और दुनिया में बाघों की संख्या भी लगातार घट रही है. यह क्रम जारी रहा तो आगामी दशक में बाघ धरती से विलुप्त हो जाएंगे. लेकिन सिर्फ बाघ ही नहीं हैं, जिनपर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है. मरीन लाइफ के आँकडों के अनुसार बाघों के जैसी ही हालत सफेद शार्क की भी है और उसके विलुप्त होने का खतरा बाघ से भी अधिक है.
कनाडा के विशेषज्ञ डॉ. रानल्ड ओडोर के अनुसार – आज तक लोग सोचते थे कि सफेद शार्क से तो इंसानों को खतरा है. इसलिए उनमें सफेद शार्क को बचाने के कोई ईच्छा नहीं थी. लेकिन अब लोग समझते हैं कि सफेद शार्क को भी जीने का पूरा हक है और हमें उन्हें बचाना चाहिए.
ऑस्ट्रेलिया में सफेद शार्क को सरंक्षित रखने के प्रयास किए जा रहे हैं. इसके लिए वहाँ समुद्री इलाकों में सफेद शार्कों के ऊपर टेग लगाए जा रहे हैं. हर बीच पर कुछ रिसीवर लगे होते हैं. जब भी कोई सफेद शार्क किनारों पर आने लगती है तो यह रिसीवर स्वचालित तरीके से पास ही मौजूद इंचार्ज के मोबाइल की घंटी बजा देता है. जिससे कि उस सफेद शार्क को समय रहते फिर से गहरे पानी में पहुँचाया जा सके.
ऐसे कई प्राणी हैं जो अब केवल चित्रों में अथवा प्राचीन दस्तावेजों के पन्नों पर बचे है. उनके विलुप्त होने के पीछे प्राकृतिक कारण तो हैं ही लेकिन इंसान भी काफी हद तक जिम्मेदार है. अब समय है कि इंसान अपनी गलतियों पर पछतावा प्रगट करे और बाकी बचे वन्यजीवों को और विशेष रूप से जो विलुप्त होने की कगार पर हैं ऐसे जीवों की रक्षा करने की जिम्मेदारी उठाए.

