Monday, Feb 13th

अंतिम अपडेट:04:05:04 AM IST

इंसान का आहार बना विलुप्तप्राय जानवरों के लिए खतरा

Print PDF

chimpanzee-cultureअफ्रीका के जंगलों में पाए जाने वाले जानवरों पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है. हिरण, रेडियंट सहित चिपांजी और बंदर जैसे जानवर विलुप्त होने की कगार पर पहुँच चुके हैं, परंतु इसके बारे में कोई चर्चा नहीं होती. इन जानवरों का बेतहाशा शिकार किया जा रहा है और इसके पीछे की वजह है भूखमरी.

एक नए अभ्यास के अनुसार अफ्रीका के कोंगो बेसिन में प्रति वर्ष 30 लाख टन 'बुश मीट" निकाला जाता है. इतना मीट 7.5 लाख हाथियों के बराबर है. इस आँकड़ॆ से पता चल जाता है कि प्रति दिन कितने जानवरों को मौत के घाट उतारा जा रहा है. मैमल रिव्यू के अभ्यास के अनुसार शिकार की दर इतनी अधिक इसलिए है क्योंकि इस इलाके में रहने वाले लोगों के पास खाने के लिए प्रयाप्त स्रौत नहीं है. इन लोगों के आहार में प्रोटीन की कमी पाई जाती है और उसे पूरा करने के लिए ये लोग जंगली जानवरों का शिकार कर "बुश मीट" निकालते हैं. बुश मीट में प्रचूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है.

कोंगो बेसिन:
कोंगो बेसिन 50 करोड़ एकड़ में फैला हुआ बड़ा इलाका है जो अफ्रीका के 8 देशों से होकर गुजरता है. इस इलाके में स्थित घने जंगलों में विभिन्न प्रकार के जंगली जानवर पाए जाते हैं. विगत कुछ वर्षों में इस इलाके में शिकार की दर खतरनाक ढंग से बढ गई है. ओवरसीज़ डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट के अनुसार इस इलाके से प्रतिवर्ष 4 करोड़ इंसानों के वजन के बराबर मीट निकाला है. यह दर लम्बे काल तक चल सके ऐसी नहीं है. यदि इसी गति से शिकार होता रहा तो कुछ ही वर्षों में चिम्पांजी और बंदर जैसे जानवर भी विलुप्त हो जाएंगे.

आज स्थिति यह हो गई है कि जो जानवर पहले विलुप्त होने के खतरे वाली स्थिति में नहीं थे वे भी अब विलुप्त होने की कगार पर पहुँच रहे हैं और बाकी दुनिया को इसका पता भी नहीं है.

BLOG COMMENTS POWERED BY DISQUS