Monday, Feb 13th

अंतिम अपडेट:04:05:04 AM IST

पत्थरों में छिपे हैं अभी कई और राज़

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Longicrusavis-houiक्या हम हमारे पूर्वजों के बारे में सबकुछ जानते हैं? क्या हम तक डायनासौर युग के सभी जानवरों के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध है?

यदि इसका जवाब हाँ में दिया जाए तो वह गलत होगा. वास्तविकता यह है कि अभी तक हम हमारे भूतकाल के बारे में काफी कम जान पाए हैं और अभी कितने ही राज़ ढूंढने बाकी हैं. चीन के उत्तरपूर्वी इलाके से प्राप्त जेहोल बायटा जीवाष्मों से हो रही नित नई खोजों से साबित होता है कि हमारे वैज्ञानिकों ने अब तक पक्षियों और डायनासौरों के बारे में बहुत सीमित जानकारी ही खोजी है और अभी बहुत सारे राज़ पत्थरों में छिपे हुए हैं, जिन्हें खोजा जाना और उनका विश्लेषण किया जाना बाकी है.

जेहोल बायटा:
उत्तरपूर्वी चीन के यिक्सिन प्रांत में जीवाष्मों का खजाना भरा पड़ा है. यहाँ की शिलाओं और पत्तरों में हजारों लाखों की संख्या में जीवाष्म प्राप्त हो सकते हैं. ये जीवाष्म मछलियों के हैं, स्तनधारी जीवों के हैं, डायनासौर के हैं तथा अन्य कई जीवसृष्टियों के हैं. इन सभी जीवाष्मों को जेहोल बायटा के नाम से जाना जाता है.

नई खोज:
जेहोल बायटा जीवाष्मों के द्वारा नित नई जानकारियाँ प्राप्त हो रही है. ऐसी ही एक जानकारी लोंगीकर्साविस हुई [Longicrusavis houi] नामक पक्षी के बारे में प्राप्त हुई है जो ओर्निथरोमोर्फ [ornithuromorph] जाति के पक्षियों से जुड़ा हुआ है. इस जाति के पक्षियों के काफी कम जीवाष्म मिले हैं और इससे इनके बारे में जानकारियों का अभाव है. परंतु जेहोल बायटा जीवाष्मों में इन पक्षियों के कई और जीवाष्म भी हो सकते हैं.

यह शोध महत्वपूर्ण है क्योंकि ओर्निथरोमोर्फ आज के आधुनिक पक्षियों से काफी मिलते जुलते हैं और अपने काल के अन्य पक्षियों से काफी अलग उभर कर आते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि अभी तक मान्य जानकारियों के विपरित लोंगिकर्साविस पक्षी एक अलग समूह के पक्षियों से जुड़े हुए थे तो उत्क्रांति के दौर में लगभग 13 करोड़ वर्ष पहले अलग हो गए.

लोंगिकर्साविस पक्षियों में दाँत पाए गए हैं, उनके जबड़े भी हैं और लम्बी पूंछ भी. वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी प्रबल सम्भावना है कि ये पक्षी तालाब के किनारे रहते थे और उनके निवास का वातावरण भी काफी अलग होगा. इन पक्षियों के पाँव अन्य पक्षियों की अपेक्षा काफी लम्बे पाए गए हैं, जो साबित करते हैं कि ये पक्षी वर्तमान बगुले की तरह तालाब में खड़े रहते थे.

वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्तमान पक्षी उन पक्षी समूहों के वंशज हो सकते हैं जो तालाब के किनारे रहते थे, और लोंगिकर्साविस ऐसा ही एक पक्षी था. जिस एक अन्य बात पर सबसे अधिक ध्यान जाता है वह यह कि उन पक्षियों में फर पाए जाते थे, जिनकी सहायता से वे आसानी से उडान भरने में सक्षम थे. वर्तमान पक्षियों में भी फर पाए जाते हैं.

चीन के यिक्सिन इलाके से प्राप्त जीवाष्म इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं, क्योंकि इन जीवाष्मों से फर और दाँत के नमूने भी प्राप्त हो रहे हैं जिससे काफी अधिक नई जानकारियाँ प्राप्त हो सकती है.

जैसा कि एक वैज्ञानिक ने एक ब्रिटिश अखबार से कहा - जेहोल बायटा के पास इतना बडा खजाना है कि वह कभी खत्म नहीं होगा. बस ढूंढते रह जाओगे!
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