Monday, Feb 13th

अंतिम अपडेट:04:05:04 AM IST

कौओं की समझदारी से चकित वैज्ञानिक

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clever-crowकौए मूर्ख होते हैं? जरा भी नहीं. बल्कि सच्चाई तो यह है कि कौए शायद चिम्पांजी और ओरांगउटान जैसे जानवरों से भी अधिक समझदार होते हैं. जहाँ बात आती है विभिन्न प्रकार की डालियों, पत्तों तथा अन्य घास फूस से औजार बनाकर अपना काम निकालने की, वहाँ कौओं का मुकाबला शायद ही कोई अन्य पक्षी या जानवर कर पाए.

न्यूज़ीलैंड ने वैज्ञानिकों ने कुछ प्रयोगों के द्वारा साबित किया है कि विभिन्न प्रकार के टूल का उपयोग करने के लिए तथा 2-3 टूल का एक के बाद एक इस तरह से उपयोग कर अपना काम निकालने में कौए काफी निपुण होते हैं. ऑकलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि जब कौओं के लिए खाना उनकी पहुँच से दूर हो जाता है तो वे ना ना प्रकार की युक्तियाँ लगाकर उस तक पहुँचने का हर सम्भव प्रयास करते हैं. शोधकर्ताओं ने न्यू कैलेडोनिया के जंगलों में कोर्वस मोनेड्यूलोईडस जाति के कौओं का अभ्यास कर यह नतीजा निकाला.

लेकिन क्या लैब परीक्षण में भी कौए अपनी समझदारी का परिचय दे पाएंगे? इसी बात की जाँच करने के लिए शोधकर्ताओं ने 7 कौओं को पकड़ा और उन पर परीक्षण किया. इन कौओं को दो समूहों में बाँटा गया. एक समूह में 3 और दूसरे समूह में 4 कौए थे.

अब उनके समक्ष एक परिस्थिति खड़ी की गई. उनके सामने खाना था लेकिन वह उनकी पहुँच से दूर था. वह खाना एक लम्बी लकड़ी से निकल सकता था, लेकिन वह लकड़ी भी एक डिब्बे में बंद थी. वह लकड़ी एक छोटे टूल से निकल सकती थी, लेकिन वह टूल भी कच्चे धागे की मदद से कौए की डाली पर लटका हुआ था.

पहले वाले समूह के कौओं को सारा कार्य एक साथ नहीं दिया गया. उन्हें एक एक कार्य अलग अलग दिया गया ताकी वे अभ्यस्त हो सकें. जब वे अभ्यस्त हो गए तो उनको तीनों कार्य एक साथ दिए गए. कौओं ने बड़ी समझदारी से काम लिया. उन्होनें छोटा टूल निकाला, उसकी मदद से डिब्बे में बंद लकड़ी निकाली और फिर उसकी मदद से अपने खाने तक पहुँच गए.

दूसरे समूह के कौओं को अभ्यस्त होने का मौका नहीं दिया गया. उनको यह कार्य एक साथ दिया गया और उन्हें परिस्थिति को समझने का मौका भी नहीं मिला. लेकिन उस समूह के चार कौओं ने भी सटीकता से काम किया. चार में एक कौए ने पहली बार में ही यह कार्य कर दिया. वह भी मात्र 110 सेकंड में. दूसरे कौए ने भी यह कार्य कर दिया लेकिन उसने समय थोड़ा अधिक लिया. तीसरे और चौथे कौए ने एक - दो बार कोशिश कर यह कार्य कर लिया.

यानी एक भी कौआ ऐसा नहीं जिसको यह कार्य समझने में मुश्किल आई हो. कौओं की इस समझदारी से वैज्ञानिक चकित हैं. जैसा कि इस शोध से जुड़े एलेक्स टेलर बताते हैं - कौए समस्या को सुलझाने के लिए युक्तियाँ लगा सकते हैं. यह तो आश्चर्यजनक खोज है."
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