आत्मघाती दस्ते यानी कि सुसाइड बॉम्बर के बारे में हम सभी जानते हैं. इन लोगों को अपनी जान की परवाह नहीं होती है और वे आतंक फैलाने और लोगों को मारने के लिए खुद के शरीर को विस्फोटकों से उड़ा लेते हैं. सुसाइड बॉम्बिंग के लिए अल कायदा और एलटीटीई जैसे आतंकवादी संगठन कुख्यात रहे हैं. लेकिन क्या मात्र इंसानों में ही इस तरह की प्रवृति देखी जाती है? कुछ नई शोधों पर नजर डालें तो पता चलता है कि प्रकृति ने इस तरह की प्रवृति कई अन्य जीवों को भी प्रदान की है, फर्क सिर्फ इतना है कि हमने प्रकृति को अभी भी पूरी तरह से समझा नहीं है.
एक पर्यावरणशास्त्री ने अपनी खोज में पाया है कि चींटी सहित कई अन्य कीटकों में आत्मघाती दस्ते पाए जाते हैं जो दूसरों की जान लेने के लिए खुद की जान भी न्यौछावर कर देते हैं. कई चिंटियाँ अपने दल और प्रदेश की रक्षा करने के लिए ऐसा करती है परंतु कई कीटक मात्र आतंक फैलाने के लिए भी ऐसा करते हैं.
इकोलोजिस्ट मार्क मोफेट ने अपनी पुस्तक एडवेंचर एमंग एंट्स में इस बात का जिक्र किया है. उन्होनें एक तस्वीर प्रकाशित की है जिसमें नजर आ रहा है कि कैसे एक मजदूर चींटी अपने शरीर में छेद कर पीले रंग का एक टोक्सिक और चिपचिपा द्रव्य निकालती है जिससे उसकी तो मृत्यु हो ही जाती है परंतु साथ ही साथ वह आस पास की हमलावर चिंटियों की जान भी ले लेती है.
डिस्कवरी न्यूज़ में छपी खबर के अनुसार यह तस्वीर ब्रोनियो में ली गई थी. इस तस्वीर को लेने से पहले मार्क मोफेट ने पूर्व तैयारी की. उन्होनें सिलिंडरिकस चिटियो के आवास वाले पेड के ऊपर थोड़ा सा शहद गिरा दिया. यह शहद धीरे धीरे पेड़ के तने पर फैलने लगा. एक घंटे के बाद मोफेट ने पाया कि कुछ अन्य नस्ल की चिंटियाँ शहद के लालच में उस तरफ आने लगी. एक चिंटी ऊपर की तरफ चढी परंतु जैसे ही उसने यह पाया कि यहाँ सिलिंडरिकस चिंटियों का आवास है, वह वापस लौट गई (शायद वह समझदार थी).
परंतु एक अन्य चिंटी ने ऐसा नहीं किया और शहद के लालच में वह ऊपर की तरफ बढने लगी. एक सिलिंडरिकस चिंटी ने उसकी मौजूदगी को महसूस किया और उसके पास आते ही खुद के शरीर में छेद कर पीले रंग का टॉक्सिक द्रव्य निकाला. इससे दोनों चिंटियाँ उस द्रव्य में चिपक गई और दोनों की मृत्यु हो गई. सिलिंडरिकस चिंटी ने अपने दल के निवास स्थान को सुरक्षित रखने के लिए खुद का बलिदान दे दिया था.
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एक अन्य खोज अभियान के दौरान मोफेट को सामुहिक आत्महत्या का मामला दिखाई दिया. उन्होनें पाया कि एक ब्राज़िलियन प्रजाति फोरेलियस पुसिलियस चिंटियाँ सामुहिक आत्महत्या भी करती है.
उन्होने देखा कि रात घिरने पर 7-8 चिंटियाँ बाहर ही रह जाती हैं और अपने घर के मुहाने को रेत से ढक देती है. वे तब तक ऐसा करती हैं जब तक कि बिल का मुहाना पूरी तरह से ढक ना जाए. सुबह होने तक वे सभी मर जाती हैं. बिल में सुरक्षित रह गई चिंटियाँ सुबह होने पर आसपास की सफाई कर देती है और रोजमर्रा के काम में लग जाती है.
तो फिर उन 7-8 चिंटियों ने आत्महत्या क्यों की? मोफेट का मानना है कि वे या तो बुजुर्ग हो गई होंगे या फिर बिमार होंगी. चिटियाँ हमेशा अपने समूह को प्राथमिकता देती है और उस पर बोझ नहीं बनती.
इस शोध से यह साबित होता है कि कई प्रवृतियाँ जो हम इंसानों में देखते हैं वे जानवरों में भी पाई जाती है, बस कभी इस ओर हमारा ध्यान नहीं गया.

