इसे चमत्कारी पक्षी कह सकते हैं. बार-टैइल्ड गोडविट हर साल अमेरीका के अलास्का से न्यूज़ीलैंड तक की उड़ान भरता है. उसकी उडान 8 दिन तक चलती है और कुल दूरी करीब 11,000 किलोमीटर की होती है. इस दौरान गोडविट ना तो कुछ खाता है ना ही पीता है और ना ही नींद ही लेता है. वह लगातार उडता रहता है और
आठवें दिन अपनी मंजिल तक पहुँच जाता है.
11,000 किमी की दूरी किसी भी पक्षी के द्वारा एक ही बार में तय की जाने वाली सबसे लम्बी ज्ञात दूरी है. इससे पहले की ज्ञात उडान दूरी इससे आधी ही थी. और
ऐसा वर्ष में दो बार होता है. जब शर्दियाँ शुरू होती है तो गोडविट अलास्का छोड न्यूज़ीलैंड चला जाता है और वसंत का मौसम आते ही फिर से अलास्का लौट आता है.
उसकी उड़ान नोन-स्टोप होती है और बीच में कहीं भी वह आराम करने के लिए नहीं रूकता है. प्रश्न यह उठता है कि आखिर यह नन्हा सा पक्षी ऐसा कैसे कर लेता है? कैसे यह पक्षी 8 दिन तक बिना खाए पीए रह जाता है और इस दौरान वह आराम भी नहीं करता.
ल्यूंड यूनिवर्सिटी के प्रो. एंडर्स एडनस्ट्रोम ने इसका जवाब ढूंढ निकाला है. एडनस्ट्रोम के अनुसार गोडविट को प्रकृति ने बेहतरीन एयरोडायनेमिक शरीर दिया है. गोडविट
मानव द्वारा निर्मित किसी भी अच्छे से अच्छे हवाई जहाज से अधिक कार्यकुशल है. इंसान के द्वारा बनाए गए एयरक्राफ्ट के द्वारा सबसे लम्बे काल तक उडान भरने का रिकार्ड 3.5 दिन या फिर 82 घंटे का है. यह रिकार्ड क्विंटिक ज़ेफायर नामक सोलर हवाई जहाज के द्वारा बनाया गया था. परंतु यह रिकार्ड गोडविट के रिकार्ड के आगे कहीं नहीं टिकता.
गोडविट का हवाई करिश्मा उसके शरीर की बनावट में निहित है. उडान के दौरान गोडविट शारीरिक ऊर्जा का कम से कम इस्तेमाल करता है. एडनस्ट्रोम के अनुसार गोडविट लगातार उडते हुए भी प्रति घंटे अपने शरीर के 0.41% वजन का ही उपयोग ऊर्जा प्राप्त करने में खर्च करता है. यह अनुपात अन्य लम्बी उडान भरने वाले पक्षियों के मुकाबले काफी कम है. इसके अलावा गोडविट का कद और उसकी बनावट तथा पंखों का माप एक दम सटीक है. जो उसे कम से कम ऊर्जा खर्च कर उडान भरने के लायक बनाता है.
दूसरी तरफ गोडविट काफी तेज उडान भरता है और लम्बी दूरी काफी कम समय में पूरी कर लेता है. एक अनुमान के अनुसार जो दूरी वह मात्र 8 दिन में पूरी करता है वह दूरी अन्य लम्बी दूरी के पक्षी 345 दिन में भी पूरी नहीं कर पाएंगे.

