शीर्ष वैज्ञानिक कोराइन ली का मत है कि दुनिया में मानव सर्जित कार्बन डायऑक्साइड की मात्रा लगातार बढ रही है और इससे पृथ्वी के वातावरण का संतुलन बिगड़ रहा है. दुनिया में औद्योगिकीकरण, यातायत और अन्य वजहों से हानिकारक वायुओं का उत्सर्जन बढ रहा है. लेकिन उससे भी चिंताजनक बात यह है कि इन वायुओं को सोख लेने की पृथ्वी की प्राकृतिक क्षमता अब जवाब दे रही है. एक अभ्यास के अनुसार सन 2000 से लेकर 2008 तक दुनिया में पेट्रोल और अन्य इंधनों की वजह से हुए कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में 29% की वृद्धि हुई है. यदि 1990 से लेकर 2008 के दौर की बात करें तो यह दर 41% है. अब तक होता यह था कि पृथ्वी की प्राकृतिक क्षमता हानिकारक वायुओं को सोख कर वातावरण पर उसके प्रभाव को कम कर देती थी.
लेकिन अब वैज्ञानिकों ने पहली बार यह पता लगाया है कि अब पृथ्वी मानव सर्जित हानिकारक वायुओं को सोख पाने में नाकाम हो रही है. पहले की तुलना में काफी अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक वायुएँ पृथ्वी के वातावरण के भीतर रह जा रही हैं और इससे गर्मी बढ रही है.
और यह हमारे लिए शुभ संदेश तो कतई नही है.

