पेड़ हमारे पर्यावरण के लिए बेहद आवश्यक है. वर्षा चक्र को सही रूप से चलाने में पेड़ महत्वपूर्ण पात्र निभाते हैं. परंतु एक नई शोध से पता चला है कि पेड यदि फूलों वाला हो तो उसका महत्व और भी अधिक बढ जाता है. फूलों वाले पेड़ पृथ्वी को ठंडा और गिला रखने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के सी. केविन बोयेस ने इस शोध को अंजाम दिया है. उनके अनुसार - फूलों वाले पौधों और पेड़ों के पत्तों की धमनियों का घनत्व बिना फूलों वाले पेडों के पत्तों की अपेक्षा कहीं अधिक होता है. इससे फूलों वाले पेड़ अधिक मात्रा में कार्बन डायोक्साइड को सोखते हैं. उनमें फोटोसेंथेसिस प्रक्रिया अधिक होती है. इसके परिणामस्वरूप वातावरण में से कार्बन डायोक्साइड की मात्रा घटती है. दूसरी तरफ ये पेड पानी का भी अधिक मात्रा में उत्सर्जन करते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि जितनी अधिक मात्रा में कार्बन डायोक्साइड सोखी जाती है उतनी ही अधिक मात्रा में पानी का उत्सर्जन करना पडता है.
इसके परिणाम स्वरूप फूलों वाले पेड जमीन में अधिक मात्रा में पानी खींचते हैं तथा वातावरण में छोड़ते हैं. यह पानी सूर्य की गर्मी से वाष्प बनकर आकाश तक पहुँचता है और फिर बादल का स्वरूप लेकर वर्षा के रूप में धरती पर वापस आता है.
यह पूरा वर्षा चक्र तब बाधित होता है जब फूलों वाले पेडों की संख्या कम हो जाए. इसका परीक्षण अमेजन के जंगल में किया गया था. वहाँ के एक भूभाग पर मात्र बिना फूलों वाले पेड़ लगाकर परीक्षण किया गया था तो पता चला कि इससे वहाँ का वातावरण 80% तक प्रभावित हुआ.
वैज्ञानिकों का मानना है कि फूलों वाले पेड़ प्रागऐतिहासिक काल में मौजूद नहीं है. उनकी उत्क्रांति 12 करोड़ वर्ष पहले हुई होगी. यही वह समय था जब डायनासौर खत्म हो रहे थे.

