समुद्र विज्ञान के दो विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने अपनी अपनी स्वतंत्र शोध में पाया है कि पृथ्वी के समुद्रों की सेहत लगातार खराब हो रही है और इसका इंसानों पर व्यापक असर पड सकता है. कुछ विशेषज्ञ यहाँ तक कह रहे हैं कि इससे यदि मनुष्य के विलुप्त हो जाने का खतरा भी उत्पन्न हो जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए. पृथ्वी पर बढ रही ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव की वजह से समुद्र का पर्यावरण संतुलन सिस्टम प्रभावित हो रहा है.
ग्लोबल चैंज इंस्टिट्यूट के निदेशक ओव ह्यूज गोल्ड्बर्ग के अनुसार - किसी समय हम पृथ्वी के वातावरण में तेजी से आए बदलाव को देखेंगे. पृथ्वी की क्षमता से अधिक मनुष्यों की जनसंख्या आज पृथ्वी पर हो चुकी है और उसके बोझ से पृथ्वी दब रही है. दूसरी तरफ समुद्र प्रदुषित हो रहे हैं और इससे भी गम्भीर खतरा उत्पन्न हो रहा है. यह इंसान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि मनुष्यों के लिए आवश्यक ऑक्सिजन में से 50% समुद्र द्वारा उत्पन्न की जाती है और इंसानों द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाइओक्साइड का 30% हिस्सा भी समुद्र सोख लेता है. इससे स्पष्ट है कि हमारे जीवनचक्र के लिए समुद्र बेहद अहम हैं.
गोल्डबर्ग के अनुसार समुद्र एक तरह से पृथ्वी के फेफडों के समान है. परंतु आज ऐसा लगता है मानो पृथ्वी हर दिन 2 पैकेट सिगरेट पी रही है और अपने फेफडों मे धुआँ भर रही है. इससे समुद्र की सेहत भी बिगड रही है.
इसके अलावा अन्य जिन विकट परिस्थितियों का सामना समुद्र कर रहे हैं उनमें शामिल हैं - अत्यधिक गर्म होना और एसिटिक होना, तेल का रिसाव, पानी के चक्र का बाधित होना, समुद्र में प्रदुषित पानी आना और समुद्र में मृत क्षैत्र [Dead zone] का निर्माण होना. इससे समुद्र का इकोसिस्टम प्रभावित हो रहा है. समुद्री वनस्पतियों का खात्मा हो रहा है, फूड चैइन में बाधा उत्पन्न हो रही है, मछलियाँ कम हो रही है, समुद्री जीवों को बिमारियाँ लग रही है आदि.
एक अन्य शोध के अनुसार ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन समुद्र को प्रभावित कर रहा है और आने वाले वर्षों में इसका घातक असर दिखाई देने की पूरी सम्भावना है.

