Wednesday, May 23rd

अंतिम अपडेट:04:05:04 AM IST

खुशखबरी! ओज़ोन की परत का नाश होना कम हो रहा है

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ozoneयह निसंदेह एक खुशखबरी है और इस खबर से साबित होता है कि यदि दुनिया भर के लोग पर्यावरण के प्रति सचेत हो जाएँ तो हम हमारे पर्यावरण की रक्षा करने में सक्षम है और यह उतना भी मुश्किल नहीं है. सयुंक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार ओज़ोन गैस की परत का नाश होने का क्रम बंद हो गया है और एक अनुमान के अनुसार 2048 तक ओजोन का स्तर अपनी पूर्ववर्त स्थिति में आ जाएगा.


हम सब जानते हैं कि कई प्रकार के रसायनिक उत्पादों और गैसों के उत्सर्जन की वजह से ओज़ोन गैस की परत को भारी नुकसान पहुँच रहा था और इससे दुनिया भर के लोगों और जीवसृष्टि के लिए खतरा उत्पन्न हो गया था. ओज़ोन गैस की परत सूर्य की पराबैंगनी किरणों को सोख कर उनका धरती पर आना कम कर देती है इससे हम पराबैंगनी रेडिएशन प्रभाव से बच जाते हैं.

1980 के बाद से ओजोन गैस की परत को नुकसान पहुँचने की दर खतरनाक ढंग से बढ गई थी और इसके लिए जिम्मेदार थे 100 से अधिक ऐसे पदार्थ और गैसें जो विभिन्न गैजेटों और उपकरणों को इस्तेमाल हो रहे थे. सबसे अधिक हानि रेफ्रिजरेटर और वातानुकूलित संसाधनों में प्रयुक्त होने वाली गैसें पहुँचा रही थी. परंतु बाद में एक आम सहमति बनी कि इस तरह की गैसों पर से आधार धीरे धीरे कम कर दिया जाएगा और अब उसका असर दिखाई देने लगा है.

अब ना केवल ओज़ोन गैस की परत को नुकसान पहुँचने का क्रम बंद हो गया है बल्कि दुनिया भर में चमड़ी का कैसर होने की दर में भी भारी कमी आने की सम्भावना दिखाई दे रही है. यही नहीं वैज्ञानिक मानते हैं कि 2048 तक ओजोन गैस की परत 1980 के स्तर तक पहुँच जाएगी.

ओज़ोन गैस की परत को पहुँच रहे भारी नुकसान को देखते हुए मोंट्रीयल प्रोटोकोल को मंजूरी दी गई थी जिसके तहत दुनिया भर की कम्पनियाँ हानिकारक गैसों पर से निर्भरता कम करने को राजी हुई थी और अब उसका असर दिखाई दे रहा है. जहाँ चाह वहाँ राह.
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